Tuesday, October 26, 2021

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आलोचना पत्रिका के बहानेः बाजार और जंगल के नियम में कोई फर्क नहीं होता!

पांच दिन पहले ‘आलोचना’ पत्रिका का 62वां (अक्तूबर-दिसंबर 2019) अंक मिला। कोई विशेषांक नहीं, एक सामान्य अंक। आज के काल में जब पत्रिकाओं के विशेषांकों का अर्थ होता है कोरा पिष्टपेषण, एक अधकचरी संपादित किताब, तब किसी भी साहित्यिक...

पंकज बिष्ट के योगदान का मूल्यांकन

पंकज बिष्ट पर यह विशेषांक क्यों?... इस सवाल का जवाब देने से पहले संक्षेप में 'बया’ के पंद्रहवें वर्ष में प्रवेश तक के सफ़र में विशेषांक निकालने को लेकर जो हमारी संपादकीय सोच रही है, उसके बाबत बताना ज़रूरी...
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सूडान में तख़्तापलट, प्रधानमंत्री समेत सभी वरिष्ठ नेता व अधिकारी गिरफ्तार

अफ्रीकी देश सूडान की सेना ने सोमवार को सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया और प्रधानमंत्री अब्दुल्ला हमदोक समेत और...
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