Wednesday, February 1, 2023

अरुण माहेश्वरी

संयुक्त मोर्चा की कठमुल्लावादी समझ

कल के ‘टेलिग्राफ़’ में प्रभात पटनायक की एक टिप्पणी है — सीमित रणनीति (Limited Strategy) । दिमित्राफ और फासीवाद के ख़िलाफ़ उनकी संयुक्त मोर्चा की कार्यनीति पर एक टिप्पणी। टिप्पणी का पूर्वपक्ष है कि यदि फासिस्टों के प्रतिरोध के लिए...

प्रतिवाद को क्या शब्दों का अभाव !

एक युग हुआ। सन् 2010 के बसंत का महीना था। तब अरब देशों में ‘सदियों’ की तानाशाहियों की घुटन में बसंत की एक नई बहार आई थी । ‘अरब स्प्रिंग’ । कहते हैं कि वह इस अरब जगत के...

रवीश में संभावनाओं का कोई अंत नहीं! 

मोदी-अडानी, अर्थात् सरकार-कारपोरेट की धुरी का एनडीटीवी पर झपट्टा भारत के मीडिया जगत में एक घटना के तौर पर दर्ज हुआ है। एक ऐसी घटना के तौर पर जो अपने वक्त के सत्य को सारे आवरणों को चीर कर...

अपने उद्देश्य की सही दिशा में सफलता से आगे बढ़ रही है ‘भारत जोड़ो यात्रा’

इसमें कोई शक नहीं है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा‘ कांग्रेस नामक राजनीतिक दल से जुड़ी उस सांकेतिकता को सींच रही है, जिससे भारतीय राजनीति में स्वतंत्रता, धर्म-निरपेक्षता, जनतंत्र और राज्य के संघीय...

गालियों का मोदीशास्त्र!

मोदी जी अक्सर हर थोड़े दिनों के अंतराल पर गालियों और कुत्साओं की गलियों में भटकते हुए पाए जाते हैं । या तो वे खुद अन्य लोगों को नाना प्रकार की गालियों से नवाजते हुए देखे जाते हैं, या...

विमर्श के लिए शब्द ज़रूरी नहीं होते हैं

अभी चंद रोज़ पहले कोलकाता में गीतांजलि श्री जी आई थीं। प्रश्नोत्तर के एक उथले से सत्र के उस कार्यक्रम में घुमा-फिरा कर वे यही कहती रहीं कि उन्हें इस बात की परवाह नहीं हैं कि कोई उनके उपन्यास...

दक्षिण रुपये पैदा करता है और उत्तर बच्चे: इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट

‘इकोनॉमिस्ट’ पत्रिका के 29 अक्तूबर के ताज़ा अंक में भारत के आर्थिक यथार्थ के बारे में आँख खोल देने वाली एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जिसका शीर्षक है - भारत का आर्थिक भूगोल: जहां देशांतर ही सब कुछ...

कितनी अहम है चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं कांग्रेस?

कल से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं कांग्रेस शुरू हो गई है । दुनिया के कम्युनिस्ट आंदोलन के जानकारों के लिए ‘20वीं कांग्रेस’ पद ही खुद में एक रोमांचकारी पद है । सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएसयू)...

‘अनहद’ का गांधी विशेषांक: सत्ता के नैतिक विमर्श में गांधी हमेशा बने रहेंगे

गांधी पर ‘अनहद’ का विशालकाय (650 पृष्ठों का) अंक एक सुखद आश्चर्य की तरह आया है; गांधी के हत्यारों के प्रभुत्व-काल में ही गांधी के पुनरोदय के संकेत की तरह के सुखद आश्चर्य की तरह। दरअसल गांधी का व्यक्तित्व अपनी...

गांधी जी, सत्य और अहिंसा

कल (1 अक्तूबर) के ‘टेलिग्राफ’ में हिलाल अहमद का एक लेख ‘सत्याग्रह’ की बद्धमूल धारणा के संदर्भ में ‘एक संभावनापूर्ण हथियार’ (Potent Weapon) अपने तमाम संकेतों के साथ बहुत महत्वपूर्ण लेख था। उसे पढ़ते हुए ही आज गांधी जयंती...

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