Wednesday, October 27, 2021

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jdi

क्या चुनाव ला पाएगा बिहार को बदहाली से बाहर?

‘‘हरे-भरे हैं खेत मगर खलिहान नहीं; बहुत महतो का मान मगर दो मुट्ठी धान नहीं। भरा है दिल पर नीयत नहीं; हरी है कोख-तबीयत नहीं। भरी हैं आंखें पेट नहीं; भरे हैं बनिए के कागज टेंट नहीं। हरा-भरा है देश रूंधा मिट्टी में ताप पोसता है विष-वट का मूल फलेंगे जिसमें...
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भाई जी का राष्ट्र निर्माण में रहा सार्थक हस्तक्षेप

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