Wednesday, October 5, 2022

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स्थाई भाव बन गई है संघियों की वर्चस्ववादी पेशवाई ग्रंथि

शाहजी राजे भोंसले (1594-1664) 17वीं शताब्दी के एक सेनानायक और बीजापुर तथा गोलकुंडा के मध्य स्थित जागीर कोल्हापुर के जागीरदार थे। वे कभी एक सल्तनत का आधिपत्य मानते तो कभी दूसरे का। अंतत: 23 जनवरी, 1664 को शिकार खेलते...
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सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने शनिवार को कहा कि कानून का शासन न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर बहुत...
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