Wednesday, October 27, 2021

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प्रधानमंत्री का स्वतन्त्रता दिवस उद्बोधन: वे बोले तो बहुत किंतु कहा कुछ नहीं

यह पहली बार हुआ है कि देश के प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस उद्बोधन को किसी गंभीर चर्चा के योग्य नहीं समझा गया। यहाँ तक कि आदरणीय मोदी जी के प्रशस्तिगान हेतु लालायित सरकार समर्थक मीडिया ने भी स्वयं को...

शख्सियत: आदिवासी समुदाय के बीच बदलाव के ‘प्रतीक’

“एक बार कलेक्टर एक गांव में गए, वहां पर एक कुआं तीन साल से आधा खुदा पड़ा था, और लगभग 45 लोगों को उसकी मजदूरी नहीं मिली थी। जब कलेक्टर गए तो पूछा कि क्या समस्या है, लोगों ने...

नॉर्थ ईस्ट डायरी: असम में दो से ज्यादा बच्चे हुए तो सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं

असम में दो से अधिक बच्चों के माता-पिता को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शनिवार को कहा कि असम सरकार राज्य की योजनाओं में लाभ लेने के लिए चरणबद्ध...

लघु बचत योजनाओं में ब्याज दर कटौती के फैसले पर भारी पड़ा बंगाल का चुनाव

अपने सुना होगा कि सुबह का भूला शाम को घर लौट आता है तो उसे भूला नहीं कहते लेकिन हमारे देश की वित्त मंत्री जी शाम को भूल गयी थीं पर अगले दिन वापस लौट आयीं! मोदी सरकार ने...
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भाई जी का राष्ट्र निर्माण में रहा सार्थक हस्तक्षेप

आज जब भारत देश गांधी के रास्ते से पूरी तरह भटकता नज़र आ रहा है ऐसे कठिन दौर में...
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