Thursday, December 9, 2021

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राजू पांडेय

संविधान दिवस की गूंज और लोकतंत्र को कमजोर करने के सुनियोजित प्रयास

संविधान दिवस पर आयोजित भव्य कार्यक्रमों का आनंद लेते हुए हमें इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि लोकतंत्र के स्वास्थ्य, मानवाधिकारों की स्थिति और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का आकलन करने वाले हर अंतर्राष्ट्रीय मापक पर हमारा प्रदर्शन...

संविधान पर चल रहे विमर्श के निहितार्थ

संविधान दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और संगोष्ठियों का एक उद्देश्य यह भी होता है कि संघ परिवार एवं उसके विचारकों की संविधान के प्रति असहमति को बहुत विद्वतापूर्ण तरीके से जायज़ ठहराया जाए। संविधान के विषय में...

अब हम लोग क्या करें सुभाष भैया?

(विगत दिनों मणिपुर में हुए आतंकी हमले में कर्नल विप्लव त्रिपाठी और उनका पूरा परिवार शहीद हो गया था। विप्लव छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के निवासी थे और उनके पत्रकार पिता सुभाष त्रिपाठी लेखक से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए...

त्रिपुरा: सांप्रदायिक हिंसा पर हमारा मौन घातक

त्रिपुरा में भी साम्प्रदायिक हिंसा का जहर पहुंच ही गया। मुख्यधारा के मीडिया ने इस दुःखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम पर मौन बनाए रखा। प्रदेश की सरकार का कहना था कि अव्वल तो कुछ हुआ ही नहीं और अगर कुछ...

ग्लोबल हंगर इंडेक्स को लेकर भी असहिष्णु सरकार

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत के खराब प्रदर्शन और भारत सरकार द्वारा इंडेक्स की विश्वसनीयता पर उठाए गए प्रश्नों पर चर्चा करने से पूर्व यह जानना अधिक आवश्यक लगता है कि सरकार कुपोषण और भूख की समस्या को लेकर...

सावरकर का हिंदुस्थान-1: प्रतिशोध और प्रतिहिंसा पर आधारित है सावरकर का दर्शन

सावरकर के आधुनिक पाठ में उन्हें वैज्ञानिक, आधुनिक और तार्किक हिंदुत्व के प्रणेता तथा हिन्दू राष्ट्रवाद के जनक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। रणनीति कुछ ऐसी है कि जब सावरकर के इन कथित विचारों को प्रचारित...

भयादोहन करने वाली बीजेपी का कश्मीरी पंडितों की पीड़ा से कोई वास्ता नहीं

जम्मू कश्मीर में हिंसा का तांडव जारी है। बावजूद इस आंकिक सत्य के कि मारे गए लोगों में अधिकतर स्थानीय मुसलमान हैं मीडिया में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आतंकी टारगेटेड किलिंग की रणनीति का उपयोग...

सावरकर जैसी दया की भीख किसी दूसरे ने नहीं मांगी

क्या सावरकर की जीवन यात्रा को दो भागों में मूल्यांकित करना ठीक है? क्या उनके जीवन का गौरवशाली और उदार हिस्सा वह है जब वे -1857 का भारत का स्वाधीनता संग्राम- पुस्तक की रचना(आरंभ 1907- पूर्णता-1909) करते हैं। इस...

द्विराष्ट्र के सिद्धांत के जनक कौन- जिन्ना या सावरकर?

पिछले तीन चार वर्ष से वी डी सावरकर को प्रखर राष्ट्रवादी सिद्ध करने का एक अघोषित अभियान कतिपय इतिहासकारों द्वारा अकादमिक स्तर पर अघोषित रूप से चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी सावरकर को महिमामण्डित करने वाली...

लखीमपुर खीरी की घटना में निहित चेतावनी को अनदेखा न करें!

लखीमपुर खीरी की घटना एक चेतावनी है- हमारे लोकतंत्र का स्वास्थ्य अच्छा नहीं है। अजय कुमार मिश्र जिनके हिंसा भड़काने वाले बयान एवं गतिविधियां चर्चा में हैं, कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं। वे देश के गृह राज्य मंत्री हैं।...

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राजधानी के प्रदूषण को कम करने में दो बच्चों ने निभायी अहम भूमिका

दिल्ली के दो किशोर भाइयों के प्रयास से देश की राजधानी में प्रदूषण का मुद्दा गरमा गया है। सरकार...