Tuesday, October 19, 2021

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Shamsurrahman Farooqui

उर्दू के क्लासिक अदब को जिंदा कर गए शम्सुर्रहमान फारूकी

यह सन् 1998 की बात है। तब मैं प्रकाशन विभाग से निकलने वाली उर्दू मैगजीन आज कल में सब एडिटर था और मेरे संपादक थे शम्सुर्रहमान फारूकी के भाई महबूब रहमान फारूकी साहब। तब शम्सुर्रहमान साहब का एक मजमून...
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सिविल नेचर के विवाद को आपराधिक केस का रंग दिया जाना अस्वीकार्य: सुप्रीमकोर्ट

उच्चतम न्यायालय की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पीठ ने कहा है कि हाईकोर्ट को इस...
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