Thursday, October 21, 2021

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‘सिधपुर की भगतणें’ : प्रमादग्रस्त स्त्रियों की शील कथा

लगभग तीन साल पहले अपनी एक ट्रेन यात्रा में हमने इस उपन्यास को पढ़ने की कोशिश की थी। उसे इसलिये महज एक कोशिश ही कहेंगे क्योंकि उपन्यास की तरह की एक रचनात्मक विधा में किये गये किसी भी गंभीर...
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ब्राह्मणवादी ढोल पर थिरकते ओबीसी के गुलाम नचनिये

भारत में गायों की गिनती होती है, ऊंटों की गिनती होती है, भेड़ों की गिनती होती है। यहां तक...
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