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Wednesday, August 4, 2021

डॉ. सिद्धार्थ

जन्मदिन पर विशेष: हिंदी साहित्य के एक ज्वालामुखी थे ओमप्रकाश वाल्मीकि

(30 जून 1950- 17 नवंबर 2013) दोस्‍तो ! बिता दिए हमने हज़ारों वर्ष इस इंतज़ार में कि भयानक त्रासदी का युग अधबनी इमारत के मलबे में दबा दिया जाएगा किसी दिन ज़हरीले पंजों समेत ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता सदियों का संताप की उपरोक्त चंद पंक्तियां ही नहीं,...

मोदी के 7 साल: उपलब्धियों के नाम पर बिग जीरो और हर मोर्चे पर नाकामियां

30 मई को मोदी के शासन काल के 7 वर्ष पूरे हो गए, प्रस्तुत है उनकी उपलब्धियों का एक संक्षिप्त आकलन  आर्थिक उपलब्धियां   गरीबी- इस बीच भारत 23 करोड़ और लोग गरीबी रेखा के नीचे धकेल दिए गए। ये लोग इसके...

बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष: बुद्ध धम्म और भारत में प्रतिरोध की बहुजन-श्रमण प्रगतिशील परंपरा

मार्क्स ने कहा था "अब तक विद्यमान सभी समाजों का लिखित इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है।" यह वर्ग-संघर्ष विचारों के संघर्ष के रूप में भी मुखर रूप से सामने आता है। भारत में वर्ग-संघर्ष ने खुद को वर्ण-संघर्ष...

बंगाली पुनर्जागरण मिथ, बंगाल में संघ-भाजपा का बढ़ता वर्चस्व और जोतीराव फुले

देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव अपने अंतिम चरण में है। चुनावी विश्लेषकों, पत्रकारों और अध्येताओं  की कौन कहे, आम आदमी भी सौ फीसदी तय मानकर चल रहा है कि भाजपा किसी भी सूरत...

भारतीय पुनर्जागरण के जनक जोतीराव फुले : एक संक्षिप्त परिचय

तुम कैसे बेशर्म हुए, वश में होकर इन ब्राह्मणों के नित छूने को चरण अरे तुम झुक जाते हो यों कैसे। आर्यों की मनुस्मृति को देखो, ध्यानपूर्वक देखो उसमें धोखा है सब देखो, पढ़ो ज़रा इनके ग्रंथों को।। - जोतीराव फुले “मेरे तीसरे गुरु...

जन्मदिन पर विशेष: ब्राह्मणवादी कवच को तोड़ कर समाज में समानता और बराबरी के ढांचे के निर्माण के पक्षधर थे राहुल सांकृत्यायन

(09 अप्रैल 1893-14 अप्रैल 1963) भारतीय उपमहाद्वीप में जन्मा कोई व्यक्ति या तो मूलत: ब्राह्मणवादी विश्व दृष्टिकोण का होता है या गैर- ब्राह्मणवादी विश्व दृष्टिकोण (श्रमण-बहुजन विश्व दृष्टिकोण) का होता। ब्राह्मणवादी विश्व दृष्टिकोण की विशेषताएं हैं- आत्मा में विश्ववास, शाश्वसत सत्य...

इतिहासकार डी. एन. झा: हिंदुत्व केंद्रित इतिहास दृष्टि को निर्णायक चुनौती

66वें भारतीय इतिहास कांग्रेस (2006) को अध्यक्ष के रूप में संबोधित करते हुए डी. एन. झा ने इतिहासकारों-बुद्धिजीवियों- कहा कि “देश की वर्तमान स्थिति का तकाजा है कि हमारे बुद्धिजीवी और विद्वान उचित प्रतिक्रिया दें। हम विषय के रूप...

बजट: राष्ट्रीय संपदा का कॉरपोरेट को हस्तानांतरण का रोडमैप

2021-22 का बजट सामान्य रूटीन का बजट नहीं हैं, यह खुलेआम इस बात की घोषणा करता है कि देश की अर्थव्यवस्था का विकास एवं संचालन निजी क्षेत्र द्वारा ही किया जा सकता है और किया जाना चाहिए। यह एक...

फुले की ‘गुलामगिरी’: ब्राह्मणवाद से मुक्ति के पहले घोषणापत्र का एक परिचय

(वरिष्ठ पत्रकार और एक्टिविस्ट प्रोफेसर दिलीप मंडल ने वसंत पंचमी (सरस्वती पूजन) के दिन डॉ. आंबेडकर के पहले गुरु ज्योतिराव फुले की सबसे प्रमुख कृति गुलामगिरी के एक अंश को उद्धृत किया, उसके बाद उनके खिलाफ टि्वटर पर #ArrestDilipMandal...

शताब्दी वर्ष पर विशेष: मेहनतकश बहुजनों की विरासत है चौरी-चौरा की क्रांतिकारी बगावत

(भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण गौरव गाथाओं में एक चौरी-चौरी की क्रांतिकारी बगावत का आज ( 4 फरवरी 2021)  शताब्दी समारोह शुरू हो रहा है। इस बगावत को वर्तमान हिंदू राष्ट्रवादी कार्पोरेट शासक वर्ग अपने तरह से व्याख्यायित करने...

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नॉर्थ ईस्ट डायरी: त्रिपुरा में ब्रू और चोराई समुदायों के बीच झड़प के बाद स्थिति नियंत्रण में

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