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संस्कृति की खाल ओढ़ कर आती सांप्रदायिकता कभी ‘इस खेमे से’, तो कभी ‘उस खेमे से’ !

हम को मालूम है जन्नत की हकीक़त लेकिन दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा… Read More