Thursday, October 28, 2021

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एक रूह जो फना हो गयी गंगा-जमुनी तहजीब का बीज बो कर

सालों पहले की बात है। हमारी दोस्त अर्चना हजरत निजामुद्दीन की दरगाह जाना चाहती थीं। सो, एक दोपहर हम वहां पहुंच गए। हजरत की दरगाह पर दुआ करने की चाहत तो होती ही है। हम अमीर खुसरो की मजार...

तथाकथित सभ्यता की दरारों में संवेदनहीन समाज की पालकी ढोती बेनाम, बेआवाज़ और अदृश्य ज़िंदगियों की ‘स्वर्ग से विदाई’

मेहनतकश लोगों के बारे में हमारी व्यवस्था किस हद तक असंवेदनशील है, इसे अचानक लागू किए गए लॉकडाउन के निर्णय से समझा जा सकता है। एक झटके के साथ सारी सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां ठप कर दी गईं। जो...
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भाई जी का राष्ट्र निर्माण में रहा सार्थक हस्तक्षेप

आज जब भारत देश गांधी के रास्ते से पूरी तरह भटकता नज़र आ रहा है ऐसे कठिन दौर में...
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