एडिटर्स गिल्ड ने राजगोपाल के मामले में चिंता जताई

नई दिल्ली। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ‘द टेलीग्राफ’ के पूर्व संपादक और वरिष्ठ पत्रकार आर. राजागोपाल का नाम पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से हटाने और इसके चलते उनके पासपोर्ट का नवीनीकरण रुकने के मामले में गहरी चिंता और आपत्ति जताई है। 

गिल्ड के अध्यक्ष संजय कपूर, महासचिव राघवन श्रीनिवासन और कोषाध्यक्ष टेरेसा रहमान के नाम से रविवार को जारी बयान में कहा गया है, “एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया उस तरीके की निंदा करती है जिससे कोलकाता के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र ‘द टेलीग्राफ’ के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल के साथ नौकरशाही व्यवहार कर रही है।”

बयान के अनुसार यह नौकरशाही तय कर रही है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं।

बयान में आगे कहा गया है कि पत्रकार और संपादक के तौर पर दशकों तक सार्वजनिक जीवन में काम करने के बावजूद, राजगोपाल आज न केवल वोटर लिस्ट से अपना नाम हटाए जाने के कारण वोट देने के अधिकार से वंचित हो गए हैं, बल्कि 100 से ज़्यादा दिनों से अपना पासपोर्ट भी रिन्यू नहीं करा पा रहे हैं। ऐसा कथित तौर पर कोलकाता पुलिस की ‘प्रतिकूल रिपोर्ट’ के कारण हो रहा है, जबकि पुलिस को शहर के प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में से एक के संपादक के तौर पर राजगोपाल की अच्छी तरह से जानकारी होनी चाहिए थी।

गिल्ड ने कहा है कि ऐसा लगता है कि पुलिस वेरिफिकेशन को इस आधार पर मंज़ूरी नहीं दी गई कि राजगोपाल का नाम अब वोटर लिस्ट में नहीं है।

गिल्ड ने कहा, “राजगोपाल की मुश्किल उस परेशानी को बता रही है जिससे लाखों भारतीय इस समय गुज़र रहे हैं। यह परेशानी चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के ‘विशेष गहन संशोधन’ के कारण हो रही है।”

गिल्ड ने कहा है कि कि अगर राजगोपाल जैसे जाने-माने सार्वजनिक व्यक्ति के साथ ऐसा हो सकता है, तो उन अन्य लोगों के हालात की सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती है जिन्हें नौकरशाही के एक फ़ैसले से वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है और जिनके पास अपनी बात रखने या समाधान पाने का कोई ज़रिया नहीं है।

गिल्ड ने चुनाव आयोग से समझदारी और सहानुभूति दिखाने और जल्द से जल्द राजगोपाल की वोटर के तौर पर पहचान बहाल करने की अपील की है और यह भी आग्रह किया है कि वह उन सभी लोगों के मामले पर भी इसी तरह विचार करे जो इसी तरह की स्थिति का सामना कर रहे हैं।

इस बीच, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की है।

वरिष्ठ पत्रकार ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया था कि एसआईआर में “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” के चलते उनका नाम मतदाता सूची से काटा गया था, जिसके खिलाफ उन्होंने ट्रिब्यूनल में अपील की हुई है लेकिन इस बीच उनके पासपोर्ट नवीनीकरण आवेदन भी लटका दिया गया और वह अप्रैल में अपनी बेटी की शादी में अमेरिका नहीं जा पाए।

(जनचौक ब्यूरो)

Leave a Reply