Friday, January 21, 2022

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अहमदाबाद में स्थानीय लोग दे रहे हैं प्रवासी मज़दूरों को नेवाला

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अहमदाबाद। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी आसानी से 21 दिनों के लॉक डाउन की घोषणा कर दी। जिसकी मार सबसे अधिक प्रवासी मजदूरों पर पड़ी।लॉक डाउन के पहले और दूसरे दिन अहमदाबाद में लाखों की तादाद में रह रहे प्रवासी मजदूरों की बड़ी संख्या भूखे सोई। कारण सब कुछ बंद था। भूखे सोने वालों में रोज़ कमाने और खाने वालों का भी एक हिस्सा शामिल था।

यही सरकार की सबसे बड़ी चूक थी। ऐसे में न तो किसी NGO और न ही सरकार के पास कोई जानकारी थी कि लॉक डाउन के बाद कौन रोटी नहीं जुटा पायेगा। जो रोटी लेकर खड़ा था उसे भी नहीं पता था किस कारखाने का मजदूर भूखा है और किस झोपड़ी में रोटी नहीं है। लेकिन जनता तो जनता है। बेदिल सरकार भले ही न समझ पाई हो कि प्रवासी मजदूर बंद कारखानों में भूखे हैं। अहमदाबाद की आम जनता खुद ही निकल पड़ी भूखे मजदूरों को ढूँढने। 

अहमदाबाद के रखियाल विस्तार में लोटस रेजिडेंसी फ्लैट में सवा सौ परिवार रहते हैं। लोटस से सटे अर्चना और बैनर स्टेट हैं जहाँ दर्जनों कारखाने हैं। लोटस रेजिडेंट्स के रहवासियों को पता चला पड़ोस के स्टेट में बहुत से मजदूर भूखे सोये हैं। इन लोगों ने तुरंत सर्वे किया तो पता चला 135 मजदूर जो इन कारखानों में रहते हैं इनके पास खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। रेजिडेंट्स की एसोसिएशन ने हर घर से एक आदमी का टिफिन कलेक्ट कर पड़ोस के स्टेट के मजदूरों को पहुंचाने का काम शुरू किया।

यह रिलीफ का एक बेहतरीन मॉडल था। जिससे किसी पर बोझ भी नहीं होगा। और 135 को लॉक डाउन तक टिफिन भी मिलता रहेगा। लेकिन अगले दो दिनों में यह संख्या 400 पार कर गई। एक घर से दो टिफिन मिलने पर भी सभी तक खाना पहुँच पाना मुश्किल था। तो इन लोगों ने फ्लैट की पार्किंग में लंगर शुरू कर दिया। यहाँ दोपहर और रात दोनों समय मजदूरों को खाना मिल रहा है। 

इसी प्रकार से सुंदरम नगर के प्रवासी मजदूर वहां रहने वाले परिवारों से रात के समय का खाना कलेक्ट करके ले जाते हैं। ताकि उन्हें एक वक़्त का कम से कम खाना मिल सके। बापू नगर की हसन शहीद दरगाह के पास कामदार एस्टेट, पन्ना एस्टेट, आरत एस्टेट, श्री हरि एस्टेट, नर नारायण इत्यादि एस्टेट हैं। जहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं। उनके लिए दरगाह कमेटी और मस्जिद के इमाम ने लंगर शुरू किया है। दरगाह से रात का भोजन इन एस्टेट के कारखानों में रहने वाले मजदूरों को भेजा जाता है।

लॉक डाउन से पहले अहमदाबाद में नागरिकता संसोधन कानून विरोधी धरने चल रहे थे। कोरोना महामारी के चलते आयोजकों ने धरने को रोक दिया था अब धरना स्थल राशन किट पैकिंग और फूड पैकिंग स्थल बन चुके हैं। अजित मील धरने की दो टीमें बनी हैं। एक पका खाना बाँट रही है दूसरी कच्चा राशन किट। जिसमें रखियाल पुलिस खुद सहयोग कर रही और कई जगह पुलिस खुद रिलीफ किट देने साथ गई। रखियाल पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर मुनव्वर खान पठान सामाजिक संगठनों से गरीबों तक मदद पहुंचाने को कह रहे हैं। लोकल IB जो राजनैतिक गतिविधियों पर अधिक नज़र रखती है।

अब गरीब और भूखे लोगों की जानकारी इकट्ठा कर समाजिक संगठनों तक पहुंचा रही है। ताकि इन तक राशन और खाना पहुँचाया जा सके। अजित मील के अलावा बापूनगर के मोरार जी चौक में भी नागरिकता संसोधन कानून विरोधी धरना चल रहा था। यह भी धरना अभी बंद है और रिलीफ वर्क चल रहा है। मोरारजी चौक से बड़ी संख्या में फूड पैकेट बांटे जा रहे हैं। 

दानी लिमडा के पार्षद शहज़ाद खान पठान ने अहमदाबाद शाह आलम और उसके आस पास विस्तार में दस हजार किट का वितरण किया है। इसी प्रकार से अहमदाबाद शहर कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चे के चेयरमैन ज़ुल्फी खान पठान ने हज़ारों की संख्या में राशन किट का वितरण किया। 

निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी के संगठन राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच ने प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए अहमदाबाद और सूरत में टीमें बनाकर फोन न. सार्वजनिक किया है। ताकि समय पर प्रवासी मजदूरों की मदद की जा सके। 

राज्य सरकार ने 1 अप्रैल से राशन कार्ड धारकों को मुफ्त अनाज देने की घोषणा की है। अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने मुफ्त फूड पैकेट के लिए टोल फ्री फोन नंबर जारी किया है लेकिन यह नंबर हमेशा बंद रहता है। पुलिस द्वारा जो मदद आ रही है वह भी सरकारी नहीं बल्कि NGOs से आ रही है। गुजरात सरकार केवल घोषणाओं के अलावा अभी तक कुछ नहीं कर पाई है। गुजरात पूरी तरह से लॉक डाउन है। अब तक राज्य में कोरोना के 69 केस सामने आये हैं। 

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीक़ी की रिपोर्ट।)

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