राजनीति तो वैसे भी कीचड़ है। और जब कोई पेशा ही कीचड़ से सना हो, तो नेताओं की क्या बिसात! संसद से लेकर विधानसभाओं में सदस्य शपथ लेते समय ईमानदारी और सचरित्रता के साथ देश और संविधान की रक्षा, पद की गरिमा बनाए रखने की बात करते हैं। लेकिन जैसे ही वे सदन के हिस्सा हो जाते हैं, अपने असली चरित्र में आ जाते हैं। वही झूठ बोलना, ठगी करना, दलाली करना, लोगों को भ्रमित करना, हाथ लगे तो दुश्चरित्रता से बाज न आना, घपला-घोटाला करना और सात पुस्तों के लिए माल इकट्ठा करना। इससे भी बात न बने, तो हिंदू-मुस्लिम का राग अलापना और खुद को महान साबित करना।
राजनीति का दोगला चरित्र भ्रमित भी करता है और लुभाता भी है। और जहाँ तक जनता की बात है, उसके बारे में तो यही कहा जा सकता है कि अपनी सब कुछ खो चुकी जनता धर्म, जाति, पैसे की लालच, डर और किसी खास जातीय-धार्मिक नेता की वफादारी के चलते केवल हाँ में हाँ मिलाती है, जयकारे लगाती है और ठहाके भी लगाती है। लेकिन भ्रम तब पीड़ा देता है, जब किसी नेता की चारित्रिक सच्चाई सामने आती है।
हम बात कर रहे हैं बिहार की चरित्रहीन हो चली राजनीति के बारे में। नीतीश बाबू आजकल जो कर रहे हैं, जो बोल रहे हैं और जिस तरह का हावभाव दिखा रहे हैं, वह अब से पहले कभी नहीं देखा गया था। बिहार और देश भी मानता था कि वे खाँटी समाजवादी हैं और चरित्र के भी धनी हैं। वे सबके हैं और पूरा समाज उनका ही है। जो वोट दे, वह भी उनका है और जो वोट न दे, वह भी उनका ही है। कम से कम नीतीश कुमार के बारे में देश की राय तो यही रही है। वे पाला भी बदलते रहे, पलटते भी रहे, लेकिन उनकी खूबियों की वजह से बिहार की बड़ी आबादी उन्हें नेता मानती रही, चुनाव में उन्हें जीत दिलाती रही और सीएम भी बनाती रही। लेकिन आज वे क्या हो गए हैं और क्यों हो गए हैं, इसका जवाब भला कौन देगा? लेकिन अब वे जो करते दिख रहे हैं, उससे साफ है कि चरित्रहीन राजनीति बिहार में कुलाँचे मार रही है और बिहारी समाज यह सब देखकर ठहाके लगा रहा है।
पहले सीएम नीतीश कुमार के बारे में भोजपुरी में वायरल इस ट्वीट को ध्यान से पढ़िए – “अरे तू चुप रह न .. ज्यादा मुँह मत फाड़िए .. तोहरे त बोले के मुँह नहीं हो .. तू ओकरे गोदी में जा बैठला जे तोहर डीएनए में खोट बताईल .. और तू त सही हस्बैंड न बन पउला, तू त जेकर-तेकर नाम पर ट्रेन चलाबे के फेर में अपन परिवार नाश लेला .. तू त जोगाड़ के दम पर कुर्सी पर चमकन माफिक चिपकल हअ, तीन नंबर के पार्टी के तीन नंबरिया जोगाड़ू नेता ..” ये शब्द हैं लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के।
रोहिणी आचार्य के इस भोजपुरी ट्वीट को अगर हिंदी में कहा जाए तो रोहिणी का बयान कुछ ऐसा है – “अरे आप चुप रहिये न –ज्यादा मुँह मत फाड़िये –आपको बोलने का मुँह नहीं है —आप उसी की गोदी में जा बैठे जिसने आपके डीएनए में खोट बताया था–और आप सही हस्बैंड भी नहीं बन पाए –आप किसी-किसी के नाम पर ट्रेन चलाने के फेर में अपने परिवार का भी नाश कर लिए –आप तो जुगाड़ से कुर्सी पर जोंक की तरह चिपके हुए हैं –तीन नंबर की पार्टी और तीन नंबर के जोगाड़ू नेता।”
रोहिणी आचार्य का यह ट्वीट बिहार की राजनीति की कलई तो खोलता ही है नीतीश कुमार को भी शर्मसार करने के लिए काफी है। रोहिणी के इस बयान में तंज तो है ही, नीतीश कुमार के चरित्र पर भी तमाचा है। नंगी राजनीति का यह नंगा खेल अमृतकाल की बानगी है। एनडीए के कई घटक दल इससे खुश भी हो रहे हैं तो कुछ शर्मसार भी। बीजेपी वाले भीतर से प्रफुल्लित हैं। चिराग पासवान भी खुश हैं। मांझी को कौन पूछता है लेकिन वे भी ठहाका लगा रहे हैं। बदले की भावना में वे खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि बिहार की चुनावी सियासत बदल सकती है।
नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हो सकते हैं या बीजेपी उन्हें गच्चा दे सकती है और ऐसी हालत में अगर वे 20 सीटों तक जीत जाए तो बिहार की कुर्सी उन्हें मिल सकती है। लेकिन जदयू के साथ खड़ी रही जनता अपने नेता के बारे में रोहिणी की बात से अचरज में हैं। वे सोच रहे हैं कि वाकई नीतीश में वह सब बुराइयां हैं जिसका बखान रोहिणी कर रही हैं। बिहार की यह राजनीति अब आगे कहाँ तक जायेगी यह देखना बाकी है।
अब यहाँ यह भी बताना ज़रूरी है कि लालू यादव परिवार की तरफ से आखिर ऐसा बयान क्यों सामने आया? जानकारी के लिए बता दें कि पिछले दिनों नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी को विधान परिषद् में सम्बोधित करते हुए कहा कि, “अरे बैठो ना तुम, तेरे हस्बैंड का है, तेरा क्या चीज है, तू बैठ जा, जो है वो हस्बैंड का है। सब लोगों को कहा कि यही पहन कर चलो। ई बेचारी को कुछ आता नहीं है। पति जब रिजेक्ट हुआ, तो इसको सीएम बना दिया था। ये तो ऐसे ही हैं।”
किसी को उम्मीद नहीं थी कि नीतीश कुमार किसी पूर्व मुख्यमंत्री और खासकर महिला के साथ ऐसा व्यवहार कर सकते हैं। नीतीश के इस आचरण से बिहार वासी भी हतप्रभ हैं और देश की महिलायें भी। जदयू के भीतर भी कई लोग मान रहे हैं कि जो हुआ वह गलत था। यह सब राजनीति के पतन का पराकाष्ठा है।
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब दोनों नेताओं के बीच मतभेद हुए हैं। इससे पहले भी बिहार विधान परिषद में नीतीश कुमार और राबड़ी देवी के बीच गरमागरम बहस हो चुकी है। दोनों के बीच यह कहासुनी कई मुद्दों पर आधारित थी, जो अक्सर राजनीतिक मंचों पर होती रहती है।
विधान परिषद में बीते मंगलवार को आरक्षण का मुद्दा तो अब्दुल बारी सिद्दीकी ने उठाया, लेकिन उनकी एक-दो पंक्तियों के बाद सबसे आक्रामक आवाज सुनील कुमार सिंह की हो गई। हरे रंग की टी-शर्ट पहन सदन पहुंचे राजद के सदस्यों की मांग विधान मंडल द्वारा पारित 65 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी बनाने और उसे संविधान की नौवीं अनुसूची में सम्मिलित करने की थी। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी विपक्ष का नेतृत्व कर रही थीं। हंगामा बढ़ा तो प्रतिक्रिया के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उठ खड़े हुए। राबड़ी से थोड़ी नोकझोंक हुई और उसके बाद कार्यवाही का बहिष्कार कर राजद के सदस्य सदन से बाहर चले गए।
कार्यवाही फिर शुरू हुई। राजद के सारे सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर आरक्षण के पक्ष और सरकार के विरोध में नारे लगाने लगे। प्रतिक्रिया में सत्ता पक्ष से भी आवाज मुखर हुई। अनिल कुमार, संजय सिंह आदि उठ खड़े हुए। इसी बीच सदन में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मुसलमानों को दिया जा रहा उपहार भी जुमला और हवा-हवाई है। सिद्दीकी ने कहा कि आरक्षण कानून बनाने वाले नेताओं को गाली सुननी पड़ रही है, क्योंकि यह प्रभावी नहीं हुआ। आरक्षण का जो हमारा अधिकार है, उसे हम छोड़ेंगे नहीं। सुनिल का आरोप था कि सरकार उच्चतम न्यायालय में पक्ष रख पाने में असफल है। मुख्यमंत्री से विपक्ष जानना चाहता है कि आगे की योजना क्या है।
फिर काफी हंगामा हुआ फिर मुख्यमंत्री उठे और बोले कि विपक्ष के हर प्रश्न का उत्तर मिलेगा। वे राजद सदस्यों की टी-शर्ट पर लिखे वाक्यों को पढ़ने लगे। उसमें तेजस्वी सरकार और आरक्षण चोर आदि वाक्यांश थे। मुख्यमंत्री ने उन शब्दों पर आपत्ति जताई। सीएम ने कहा कि राजद की यही संस्कृति है। तब तक राबड़ी देवी उठ खड़ी हुईं, तो नीतीश बोले, “तोरा कौन चीज है, जो है, सब हसबैंड का है। तू बैठ जा। ई बेचारी को कुछ आता है, इसको तो ऐसे ही मुख्यमंत्री बना दिया, जब रिप्लेस हो रहे थे तो इसे ऐसे ही बना दिया। ई लोग जो कर रहे हैं, क्या मतलब है।”
लालू यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने अपने ट्वीट में नीतीश पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए इधर-उधर के नाम पर अर्चना और उपासना नाम से रेल शुरू की है।
थोड़ा पीछे चलने की जरुरत है। 2017 की यह बात है। जदयू के तीन प्रवक्ताओं ने एक साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए उनकी पुरानी तस्वीर सार्वजनिक करते हुए उन्हें शराबी बताया था। वहीं इसके जवाब में तेजस्वी ने भी सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला और पूछा, “नीतीश जी बताएं कि ये ‘अर्चना’ और ‘उपासना’ कौन थीं जिनके नाम पर आपने रेल मंत्री रहते हुए ट्रेनों के नाम रखे थे।”
बता दें कि जदयू नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर तेजस्वी यादव की एक लड़की के साथ फोटो दिखाई थी जिसमें शराब की बोलतें भी दिख रही थी। जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह और अन्य दो अन्य प्रवक्ता नीरज कुमार और निखिल मंडल प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे।
जदयू की प्रेस कॉन्फ्रेन्स के बाद राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रेस कॉन्फ्रेन्स किया। तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के इशारे पर जदयू नेताओं ने ये प्रेस कॉफ्रेंस की है।
तेजस्वी ने कहा, “शराब बंदी को लेकर हमने सवाल उठाये थे और उम्मीद थी कि प्रेस कांफ्रेंस में हमारे सवालों का जवाब मिलेगा। लेकिन वो नहीं मिला। मेरी जो तस्वीर दिखाई जा रही है यह साल 2012 में मेरे राजनीति में आने से पहले की है जब मैं क्रिकेट खेला करता था, आईपीएल खेलता था। उस समय क्रिकेटरों की पार्टियां भी होती थीं। भारत के कप्तान विराट कोहली समेत कई खिलाड़ियों के साथ मैंने क्रिकेट खेला है। पार्टियों के दौरान कई लोग सेल्फी लेने के लिए आते थे। उनमें से सभी लोगों को मैं नहीं जानता। एक महिला के साथ सेल्फी खिंचवाना पर किसी के चरित्र पर उंगली नहीं उठाई जा सकती। मेरी एक पुरानी तस्वीर को जारी कर नकारात्मक राजनीति की शुरुआत की गई है। हम नकारात्मक राजनीति नहीं करेंगे।”
फिर तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निजी हमला करते हुए कहा, “जब नीतीश कुमार रेलमंत्री थे तो उन्होंने अर्चना और उपासना नाम से ट्रेनें चलायी थीं। खास बात यह है कि इन ट्रेनों को रेलवे बोर्ड की मंजूरी भी मिली थी। हमारा परिवार काफी बड़ा है। दिल्ली में छह-छह बहनें रहती हैं। हमें सब जानकारी है। मुख्यमंत्री जब दिल्ली जाते हैं, तब बिहार भवन में सामान रख कर कहां-कहां जाते हैं, सब पता है। कितनी गाड़ियां बदल कर कहां-कहां जाते हैं। सारी जानकारी है।
तेजस्वी के बाद जदयू के तीन प्रवक्ताओं ने पत्रकार सम्मेलन में तेजस्वी यादव का एक लड़की के साथ फोटो भी जारी किया। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद किसी के खिलाफ कुछ बोलने से पहले अपना घर देख लें। उन्होंने कहा कि आरोप लगाएंगे तो जवाब भी मिलेगा। नीरज कुमार ने कहा कि तेजस्वी दिल्ली जाते हैं तो कहां रहते हैं उन्हें बताना चाहिए। तेजस्वी यादव पर शराब पीने का आरोप लगाते हुए नीरज कुमार ने कहा, “हम लालू को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। वे अपने किसी पैथोलॉजिस्ट से हमारे खून की जांच करा लें। साथ ही लालू हमारे घर की तलाशी लें और हम उनके घर की तलाशी लेंगे। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। जनता को पता चल जाएगा कि किसके घर में शराब रहती है।”
बिहार की चरित्रहीन राजनीति का सच और भी बड़ा है। उसे खोल दिया जाए तो कई नेता कहीं के नहीं रहेंगे लेकिन इसकी जरुरत भी नहीं है। इधर दिल्ली की संसद में बुधवार को जो हुआ वह भी घटिया राजनीति की पराकाष्ठा ही थी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सख्त हिदायत दी। उन्होंने कांग्रेस नेता से सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए नियमों का पालन करने को कहा। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि अध्यक्ष ने यह टिप्पणी क्यों की। इस पर राहुल की ओर से भी प्रतिक्रिया दी गई। राहुल ने कहा कि मैंने तो कुछ भी नहीं बोला, मैं तो चुपचाप बैठा था। विपक्ष को बोलने ही कहा दिया जाता था।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे सदन के उच्च मानकों और गरिमा को बनाए रखने के लिए ऐसा आचरण करें। अध्यक्ष ने कहा, ‘मेरे संज्ञान में कई ऐसे मामले आए हैं, जहां सदस्यों का आचरण मानकों के अनुरूप नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘इस सदन में पिता और पुत्री, माता और पुत्री, पति और पत्नी सदस्य रहे हैं। इस संदर्भ में मैं विपक्ष के नेता से अपेक्षा करता हूं कि वे नियम 349 के अनुसार आचरण करें, जो सदन में सदस्यों द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों से संबंधित है।’
विपक्ष के नेता ने दावा किया कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है और सदन को अलोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने उनके बारे में टिप्पणी की और फिर उन्हें बोलने का मौका दिए बिना सदन को स्थगित कर दिया। पिछले सप्ताह उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई थी। इस बीच पार्टी सूत्रों ने बताया कि लोकसभा के उपनेता गौरव गोगोई, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और लोकसभा में पार्टी के सचेतक मणिकम टैगोर सहित कांग्रेस के करीब 70 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और राहुल को सदन में बोलने का मौका न दिए जाने का मुद्दा उठाया।
इस मुद्दे को लेकर बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी बहन और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी को दुलारते नजर आ रहे हैं। अमित मालवीय ने दावा किया है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इसी वजह से राहुल गांधी को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाया। अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “यह शर्मनाक है कि लोकसभा अध्यक्ष को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बुनियादी संसदीय शिष्टाचार की याद दिलानी पड़ रही है। कांग्रेस ने इन्हें हम पर थोपा है, जो वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है।”
जिस संसद में खड़े होकर बीजेपी के एक सांसद ने दूसरे संसद को गलियां दी। बीजेपी के एक सांसद पर महिला खिलाड़ियों ने यौन शोषण का आरोप लगाया, जिस संसद में बैठकर लोग झूठ बोलते हैं वही उसी संसद में राहुल गाँधी को यह कहा जाता है कि संसद में नैतिक व्यवहार करना चाहिए। घटिया राजनीति तो यह है कि राहुल और प्रियंका की भाई-बहन वाली बॉन्डिंग को भी बीजेपी वालों ने बदनाम कर दिया।
(अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं)
+ There are no comments
Add yours