टेनिस खिलाड़ी राधिका …और ऑनर किलिंग कब तक? 

हरियाणा में हृदयविदारक ऑनर किलिंग का मामला प्रकाश में आया है जिसमें पिता द्वारा अपनी 25 वर्षीय बेटी, पूर्व टेनिस खिलाड़ी जो टेनिस अकादमी चला रही थी, को पीठ पर अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से तीन गोलियां चलाकर शूट कर दिया। वह किचेन में काम कर रही थी।

जिस हरियाणा प्रदेश ने महिला खिलाड़ियों के ज़रिए देश को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। वहां एक अन्तर्राष्ट्रीय उभरती टेनिस महिला खिलाड़ी राधिका को दी गई यह मौत समझ से परे है।

विशेष बात ये कि राधिका को टेनिस के क्षेत्र में जो मुकाम हासिल हुआ उसमें उसके पिता दीपक यादव की ही प्रमुख भूमिका रही है। वे बिल्डर हैं। परिवार सुख सुविधा सम्पन्न है। बताया जा रहा है कि अकादमी हेतु पिता ने एक करोड़ से अधिक राशि राधिका को दी थी।

फिर यह सब कैसे हुआ जानकर बहुत अफसोस हो रहा है कि ऑनर किलिंग के लिए और खाप पंचायतों के निर्णयों के लिए चर्चित हरियाणा में राधिका का लहू भी ऑनर किलिंग के लिए बहाया गया। यह मौत देश के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसका अहसास हरियाणा को आगे चलकर होगा। देश इस घटना से गहन सदमे में है।

बताया जा रहा है कि गोली दागने के बाद पिता किचेन में बेटी के पास बैठा मिला और रिवाल्वर भी वहीं पड़ी थी। पुलिस ने उसे अपराधी मानते हुए गिरफ्तार कर लिया है। उसने पूछताछ के दौरान बताया कि” पिछले तीन माह पूर्व टेनिस खेलते हुए राधिका के हाथ में चोट आ गई थी।उसने खेलना बंद कर दिया था तथा लड़के लड़कियों को खेल सिखाने अकादमी खोल ली थी। उससे उसे अच्छी खासी कमाई हो रही थी। उसकी कमाई खाने के ताने मुझे लोगों द्वारा दिए जा रहे थे।

मैंने कई बार बेटी से इसे बंद करने को कहा पर वह कहती रही कहने दें इससे क्या होता है। मुझे जो करना मैं करूंगी। उस रोज भी मैंने उससे यही कहा जब उसने वही जवाब दिया तो उत्तेजित होकर मैंने उसकी पीठ पर तीन गोलियां चला दीं। मैं अपना अपमान समाज में नहीं सह सकता था।”

देश में महिला सम्मान और बेटियों को अपनी ज़िंदगी जीने की कवायद हो रही है सरकार उन्हें स्वावलंबन का पाठ पढ़ा रही है और आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए काम में लगी राधिका यादव को मौत मिलती है। कहने का आशय यह है कि यहां पितृवादी समाज स्त्री को आज भी अपने इशारों पर चलने के लिए मज़बूर कर रहा है।यह एक उदाहरण सामने है पर्दे के पीछे यहां की स्त्रियों का जीवन कैसा होगा सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

एक रील से भी इस मानसिकता का होना बताया जा रहा जिसमें राधिका ने अपनी अभिनय क्षमता का पता लगाने के लिए इकबाल के साथ एक गीत का फिल्मांकन किया था। सूत्र बताते हैं तकरीबन एक वर्ष पहले इस गाने को शूट किया गया था। शूटिंग के समय मां साथ थीं। राधिका ने भी बताया था कि इस गीत से पिता भी खुश थे। हां,ये ज़रूर हुआ कि उसने अपने फेसबुक अकाउंट से उसे हटा दिया था। शायद इसके पीछे भी ऐसे ही लोग होंगे।

कुल मिलाकर ऑनर किलिंग, अक्सर, परिवार के पुरुष सदस्यों द्वारा किसी महिला या लड़की की हत्या होती है। हत्यारे यह दावा करके अपने कृत्य को उचित ठहराते हैं कि पीड़िता ने परिवार के नाम या प्रतिष्ठा को कलंकित किया है ।

पितृसत्तात्मक समाजों में, लड़कियों और महिलाओं की गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखी जाती है। एक महिला के कौमार्य और “यौन शुद्धता” को बनाए रखना पुरुष रिश्तेदारों की ज़िम्मेदारी मानी जाती है—पहले उसके पिता और भाई, और फिर उसका पति। ऑनर किलिंग की शिकार महिलाओं पर आमतौर पर “यौन अनैतिक” गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया जाता है , जिसमें उन पुरुषों से खुलेआम बातचीत करना शामिल है जो उनके रिश्तेदार नहीं हैं, या विवाहेतर यौन संबंध बनाना (भले ही वे बलात्कार या यौन उत्पीड़न की शिकार हों)।

हालाँकि, एक महिला को कई अन्य कारणों से भी हत्या का निशाना बनाया जा सकता है, जिनमें अरेंज मैरिज में शामिल होने से इनकार करना या तलाक या अलगाव की मांग करना। यहाँ तक कि एक दुर्व्यवहार करने वाले पति भी इसमें शामिल हैं। केवल इस संदेह से कि किसी महिला ने ऐसा काम किया है जिससे उसके परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँच सकती है, हमला हो सकता है; ये धारणाएँ आमतौर पर वस्तुनिष्ठ सत्य के बजाय पुरुषों की भावनाओं और धारणाओं पर आधारित होती हैं। विडंबना यह है कि महिला रिश्तेदार अक्सर हत्याओं का बचाव करती हैं और कभी-कभी उन्हें रचने में भी मदद करती हैं।

हालाँकि इस तरह के अपराधों की रिपोर्ट कम होने का संदेह है, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष का अनुमान है कि हर साल लगभग 5,000 महिलाओं की हत्या सम्मान के नाम पर की जाती है। ये अपराध पूरी दुनिया में होते हैं और किसी एक धर्म या आस्था तक सीमित नहीं हैं। हालाँकि, ये मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के विभिन्न हिस्सों में काफ़ी हद तक और लगातार होते रहे हैं , और लगभग आधी ऑनर किलिंग भारत और पाकिस्तान में होती हैं ।

इक्कीसवीं सदी में, ऑनर किलिंग के बारे में अंतर्राष्ट्रीय जागरूकता बढ़ी, हालाँकि, कुछ देश इसे प्रभावी रूप से अपराध घोषित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने में अनिच्छुक रहे। अपेक्षाकृत दुर्लभ मामलों में, जब किसी पुरुष पर हत्या का मुकदमा चलाया जाता था , तो बाद का मुकदमा अक्सर महिला के कथित व्यवहार पर केंद्रित होता था, न कि उसके खिलाफ की गई हिंसा पर। जब कोई पुरुष दोषी पाया जाता था, तो प्रतिवादी यह दावा कर सकता था कि अपराध कलंकित पारिवारिक सम्मान की बहाली के लिए किया गया था और अदालत में कम सज़ा के लिए याचिका दायर कर सकता था।

उदाहरण के लिए, भारत में, सरकार ने 1980 के दशक में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया था। हालाँकि, ग्रामीण इलाकों में अंतर्जातीय और अंतर्धार्मिक विवाहों के आधार पर ऑनर किलिंग होती रहीं, जहाँ गाँव के निवासियों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन के कारण पुलिस को इनकी सूचना नहीं दी जाती थी। रिपोर्ट दर्ज होने पर ऐसी हत्याओं को अक्सर दुर्घटना मान लिया जाता था। किसी महिला को पीटने, जलाने, गला घोंटने, गोली मारने या चाकू मारने की घटना को आत्महत्या माना जा सकता था , भले ही शरीर पर कई घाव हों और महिला द्वारा खुदकुशी करने की कोई संभावना न हो।

कुछ देशों में, जैसे जॉर्डन में , ऑनर किलिंग या तो कानूनी है या न्यूनतम दंडनीय है। जॉर्डन दंड संहिता की धारा 340 उन लोगों को दंड से मुक्त करती है जो व्यभिचार के “दोषी” पाए गए महिला रिश्तेदारों की हत्या करते हैं , और अस्थायी दंड संहिता की धारा 76, हमले के अपराधों में प्रतिवादियों को “अपराध को कम करने वाले कारण” बताने की अनुमति देती है। 2011 में, जॉर्डन के विधायकों ने ऑनर किलिंग में प्रतिवादियों द्वारा इसके इस्तेमाल को रोकने के लिए धारा 76 में संशोधन करने का प्रयास किया , लेकिन सामाजिक समूहों के दबाव के कारण ये प्रयास विफल हो गए‌

हमारे देश में इस घटना ने फिर ऑनर किलिंग की मौजूदगी का अहसास कराया है। भारत सरकार क्या नारी सम्मान, नारी स्वाभिमान और स्वावलंबन के वजूद की सुरक्षा के लिए कोई कारगर कदम उठाएगी?यह सिर्फ राधिका के लिए न्याय की बात नहीं है यह निर्भयाकांड के बाद बने कानून दंड विधि संशोधन अधिनियम, 2013, जिसे आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 भी कहा जाता है, भारत में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों और अन्य गंभीर अपराधों से निपटने के लिए बनाया गया था। इस अधिनियम ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में संशोधन किया गया। इसी तरह ऑनर किलिंग हेतु भी सख्त कानून की ज़रुरत है। जिससे समस्त देश की मां बहनों के जीवन की सुरक्षा हो और साथ ही उनकी अपनी पहचान भी बन सके।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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