कोलकाता। सोमवार को तृणमूल कांग्रेस द्वारा कोलकाता के धर्मतल्ला में ‘शहीद दिवस’ मनाया गया। लगभग एक सप्ताह के अंदर टीएमसी की यह दूसरी बड़ी गेदरिंग थी। जिसमें बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए टीएमसी यहीं से शंखनाद करेगी।
सोमवार को हुई इस रैली में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के अलावा राज्य महासचिव अभिषेक बनर्जी और अन्य टीएमसी नेता मौजूद थे। सभा को संबोधित करने से पहले ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी शहीद झंटु अली शेख और बितान अधिकारी के अभिभावक से मिले।
टीएमसी के अधिकारिक एक्स अकांउट से पोस्ट की गई इस पोस्ट में ममता बनर्जी शहीद के मां से गले मिल रही हैं और अभिषेक बनर्जी पैर छूते नजर आए।
इसके साथ ही पहलगाम और उधमपुर में शहीद हुए जवानों के माता-पिता को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हाथ पकड़कर मंच पर लेकर गईं और उन्हें बैठाया।
भाषा आंदोलन शुरु
आज की सभा से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों ने ही आगामी विधानसभा चुनाव का शंखनाद कर दिया है। इसके साथ ही बंगाली अस्मिता और बांग्ला भाषा का मुद्दा जोर-शोर से उठाते हुए भाजपा पर सीधा प्रहार किया है।
भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषियों पर लगातार होते हमले को देखते हुए आज ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि ’27 जुलाई से भाषा आंदोलन शुरु होगा और आगामी चुनाव तक जारी रहेगा। जिस पर ममता बनर्जी का कहना है हम किसी भी भाषा पर हमला बर्दाश्त नहीं करेंगे’।
वह आगे कहती हैं भाजपा शासित राज्यों में लोगों के खानपान पर भी सवाल उठाएं जा रहे हैं, अब भाजपा तय करेगी, कौन अंडा खाएगा कौन मीट, दुकान पर लोगों से कहा जा रहा है मछली न खाएं, मीट न खाएं। इसके लिए दुकानों पर तोड़फोड़ की जा रही हैं’ अगर हिम्मत है तो यह सब बंगाल में करें, साहस के साथ इसका जवाब दिया जाएगा’।
‘वे हमें बांग्ला बोलने नहीं देगें। भाजपा के एक नेता कह रहे हैं बंगाल में 17 लाख रोहिंग्या हैं। इतने लोगों के बारे में भाजपा के नेता को कैसे पता है?
भाजपा पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा कि ‘आप बंगला बोलने से डरते हैं। जबकि बांग्ला ने ही रविंद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपध्याय, काजी नजरुल इस्लाम को जन्म दिया है। यहां तक की राष्ट्रगान भी बंगला में लिखा गया है।
बांग्ला भाषा का आतंकवाद क्यों
आज भाजपा बंगाल के विकास से डरी हुई है। इसलिए अभाव की राजनीति कर रही है। वह सवाल करती है, आखिर बांग्ला भाषा पर इतना आतंकवाद क्यों है। जबकि बंगाल से आजादी की लड़ाई लड़ी गई है। नवजागरण बंगाल से ही हुआ है। फिर राज्य से बाहर बांग्ला बोलने पर लोगों को गिरफ्तार क्यों किया जा रहा है। अब इसकी लड़ाई दिल्ली में लड़ी जाएगी। यह हमारी अस्मिता का मामला है।
धर्मतल्ता में हजारों की संख्या में आएं लोगों को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि ‘बंगाल का यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा और उसी दिन खत्म होगा जब दिल्ली में बदलाव होगा’।
ममता ने बड़े आक्रोश में हिंदी में कहा कि ‘आज चुनाव आयोग बिहार में स्पेशल इंटेशिव रिवीजन के कारण 40 लाख लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काटा जा रहा है। यही भाजपा बंगाल में भी करना चाहती है। अगर यहां हुआ तो हम लोग आंदोलन करेंगे घेराव करेंगे, लेकिन वोटर लिस्ट से नाम नहीं कटने देंगे’।
उऩ्होंने केंद्र सरकार की स्कीम मनरेगा का जिक्र कर भाजपा से सवाल पूछते हुए कहा कि “100 दिन के काम का पैसा रोककर आप क्या सोच रहे थे? क्या बंगाल इसे शुरु नहीं कर सकता? हमने कर दिखाया और राज्य में लोगों को 100 दिन का काम देना शुरू कर दिया है। हमारी सरकार ने बंगाल में 40 प्रतिशत गरीबी को कम कर दिया है और यह हम लोगों के गौरव का विषय है’।
आपको बता दें कि पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य सरकार ने बंगाल की जनता को 100 दिन के काम की गारंटी के तहत राज्य स्तर पर स्कीम शुरू की थी। जिसके तहत मनरेगा में काम करने वाले लोगों को काम दिया जाएगा।
मां-माटी-मानुष बनी ताकत
ममता यही नहीं रुकी उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी की सबसे बड़ी संपत्ति उसके कार्यकर्ता होते हैं। मेरी पार्टी की संपत्ति मां-माटी-मानुष है। तृणमूल के शुरुआती दिनों में लोग कहते थे घास गाय खा जाएगी। आज तृणमूल बरगद के पेड़ के सामान है।
ममता ने कहा कि भाजपा सोच रही है कि वह ममता और अभिषेक पर प्रहार कर तृणमूल को कुचल देंगे। ईडी और सीबीआई का डर दिखाकर सब कुछ खत्म कर देंगे। लेकिन यह आपकी सबसे बड़ी भूल हैं। आखिर कितने लोगों को जेल में डालेंगे।
वह कहती हैं अब समय आ गया कि 27 जुलाई नानूर दिवस से, बांग्ला भाषा पर हमले के विरोध में हर शनिवार और रविवार को बैठकें और जुलूस निकालें जाएं। साथ ही जनता से अनुरोध किया कि इस विरोध में आगे आएं। इस बार भाषा की रक्षा की शपथ लें।
2026 के बाद भाजपा डिटेंशन सेंटर जाएगी
वहीं दूसरी ओर अभिषेक बनर्जी ने भी भाजपा पर जमकर प्रहार करते हुए इसे ‘बांग्ला विरोधी’ पार्टी बताते हुए कहा कि यह लोगों को डिटेंशन सेंटर भेज रहे हैं। लोगों को उनकी मातृभाषा बोलने पर प्रताड़ित कर रहे हैं।
जबकि आने वाले विधानसभा चुनाव 2026 को जनता भाजपा को ही डिटेंशन सेंटर भेज कर पूरे राज्य से ही खत्म कर देगी।
उन्हें भाजपा से सवाल किया कि असम में बांग्ला भाषी लोगों पर हो रहे अत्याचार पर भाजपा मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा पर पार्टी एक्शन ले रही है? जबकि यही से भाजपा का असली चेहरा भाषा को लेकर साफ नजर आता है।
उन्होंने आगे कहा अगर जरुरत पड़ी तो पश्चिम बंगाल के सांसद मानसून सत्र के दौरान संसद में बांग्ला बोलेंगे और देखेंगे कि उन्हें कैसे चुप कराया जाता है।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटें जीती थी। लेकिन इस बार यह 50 सीटें भी नहीं जीत पाएंगे। आप मेरी बात को मार्क कर लें, अगले साल चुनाव के रिजल्ट के दौरान यही होने वाला है।
इसको लेकर मैं कोई भविष्यवाणी नहीं कर रहा। बल्कि मुझे बंगाल की जनता पर भरोसा है। जिस तरह से उऩ्हें भाषा के नाम पर भाजपा शासित राज्यों मे तंग किया जा रहा है। लोगों इन्हें वोट नहीं करेंगे।
भाजपा पहले अपनी राजनीति के लिए ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते थे। अब ‘जय मां दुर्गा’ और ‘जय मां काली’। अगले दस महीनों यह ‘जय बांग्ला’ का नारा लगाएंगे।
फिलहाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा को जो बांग्ला विरोधी पार्टी कहा है यह कोई स्लोगन नहीं बल्कि इनकी सच्चाई है।
विधानसभा चुनाव की तैयारी
आपको बता दें अगले साल अप्रैल में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। जिसको लेकर सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। तृणमूल इस बार भाषा के मुद्दे को जोर- शोर से उठा रही है। वहीं दूसरी ओर भाजपा राज्य में भ्रष्टाचार, आरजीकर का मामला और हिंदुओं पर हमले पर जोर दे रही है।
18 जुलाई को दुर्गापुर में हुई पीएम मोदी की रैली के दौरान पीएम ने मुर्शिदाबाद हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि “हिंसा के दौरान पुलिस ने पक्षपात किया है। यहां कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है’।
साल 2011 में टीएमसी सत्ता में आई थी। साल 2011 में ममता ने मां माटी मानुष, साल 2016 में बांग्ला निजेर मेए के चाई और साल 2021 में खेला होबे का नारा दिया था।
पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई 1993 को ममता के नेतृत्व में मतदान के लिए पहचान पत्र अनिवार्य करने की मांग पर प्रदर्शन हुआ। मार्च के दौरान गोलियां चली। जिसमें 13 लोगों की मौत हो हुई। इसी के स्मरण में टीएमसी द्वारा 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाया जाता है।
जिस वक्त यह घटना हुई ममता बनर्जी युवा कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष थी और राज्य में माकपा के ज्योति बसु मुख्यमंत्री थे।
(कोलकाता से पूनम मसीह की रिपोर्ट)