अब तो जाग जाओ, मतदाताओं। तुम्हारी ख़ामोशी से पिछले ग्यारह वर्षों से जो हमने अपने दिन भाजपा सरकार के निरंकुश साए में बिताए हैं वो सब फर्जी सरकारें थीं। यह बात दिल्ली में प्रतिपक्ष नेता कुशल राजनीतिज्ञ राहुल गांधी ने एक विशाल प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस तरह एक शोधकर्ता की तरह उदाहरण और मय प्रमाण के प्रस्तुत की उससे साबित होती है। आज उन मतदाताओं ने चैन की सांस ली है जो यह कहते आए हैं यह जीत संदेहास्पद है। लेकिन कुछ कर नहीं पाए।
एक लोकतांत्रिक देश में जिस तरह चुनाव आयोग ने पीएम के इशारे पर मतदान विरोधी कार्य को अंजाम दिया वह देश के मतदाताओं का घोर अपमान है, उसके विरुद्ध एक बड़ा जन अभियान चलाने की ज़रूरत है। यदि कहीं इस सरकार में लेशमात्र भी शर्म बाकी है तो उसे आज ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। चुनाव आयोग के वर्तमान और सेवानिवृत्त आयुक्तों को भी कटघरे में खड़ा कर दंडित करना चाहिए।
मगर ये दोनों प्रक्रियाओं को शायद कोई अंजाम नहीं देगा क्योंकि सरकार भला इन पर कार्रवाई करके मुसीबत मोल कैसे ले सकती है हो सकता है ये चुनाव अधिकारी सरकारी आदेश को सुरक्षित रखें हों। इसीलिए इस तालमेल का फेल होना असंभव है। तब एक ही रास्ता बचता है कि माननीय सीजेआई महोदय की अदालत में सर्वदलीय सदस्यों की समिति के साथ देश के प्रबुद्ध जन, मतदाता मिलकर इस मामले को तुरंत संज्ञान में देकर उचित दिशा निर्देश लें तथा दोषियों को सख़्त सजा के प्रावधान की याचिका लगाएं।
निष्पक्ष जांच हेतु चुनाव आयोग और सरकार को भी भंग करने और मिली-जुली सरकार को यह दायित्व सौंपने की भी मांग की जाए। चूंकि मामला बहुत गंभीर है यह सीधे-सीधे वोट चोरी और मतदाताओं के वोट का अपमान है। संविधान और प्रजातंत्र विरोधी काम है। वोट चोरी से बनी हुई सरकार को खारिज करें और उन सभी नेता, मंत्रियों, सांसदों से जिनके वोट चोरी के प्रमाण सामने आए हैं, उनसे जनता के खजाने से पाए अब तक के मानदेय धन की वसूली की जाए।
यह भारतीय लोकतंत्र के साथ किया गया सबसे बड़ा आपराधिक मामला है जो राहुल गांधी ने छै महीनों की कड़ी मशक्कत के बाद सप्रमाण सामने लाया है। उल्टा चोर कोतवाल को डांटे की तरह प्रेस कांफ्रेंस समाप्त होने से पूर्व ही चुनाव आयोग राहुल गांधी से हलफ़नामा मांग कर उन्हें सज़ा का डर दिखा रहा है। जनाब वह तो सार्वजनिक है, आपकी मीडिया के पास है उसे मांगने और धमकाने की क्या ज़रूरत है? समस्त वीडियो है प्रमाणिक तौर पर और क्या चाहिए आपको। करिए क्या कार्रवाई करनी है?
स्मरण कीजिए ये वही राहुल गांधी हैं जिन्होंने बहुत पहले कहा था -चौकीदार चोर है।” आज यह बात विदेश नीति, रक्षा नीति, अर्थनीति, शिक्षा नीति सभी जगह उजागर होती हुई तथाकथित स्वतंत्र इकाई चुनाव आयोग और स्वतंत्र एजेंसियों से होती हुई अदालतों के द्वार तक पहुंच चुकी है। हमारे चौकीदार ने चोरी का नया इतिहास बना लिया है।
आइए, संकट के इस दौर में जब प्रजातंत्र को ख़त्म करने की साज़िश का पर्दाफाश हुआ है। हम सब एक हों और देश के लुटेरे, वोट चोरी करने वालों को सबक सिखाने के लिए जाग जाएं। पांच किलो अनाज, कृषक सम्मान निधि या लाड़ली बहना जैसे कथित रक्षा सूत्र के बंधन से मुक्त हों। अपने हक को ससम्मान पाने, रोजगार की बात करें। अपने खोए अधिकार पाने के लिए प्रतिबद्ध हों। अब तो जागिए, शोर बढ़ गया है और रोशन सुर्ख सबेरा करीब आ पहुंचा है।
(सुसंस्कृति परिहार का लेख।)