पटना। 16 दिन, 23 जिले, 1300 किलोमीटर और 67 विधानसभा से पार होती ‘वोट अधिकार यात्रा’ का समापन एक सितंबर को पटना में हुआ। अंतिम दिन गांधी मैदान में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से महागठबंधन के समर्थक और कार्यकर्ता जमा हुए।
तय कार्यक्रम के अऩुसार पहले पटना के गांधी मैदान में सभा होनी थी, लेकिन बाद में इसे तीन किलोमीटर की पैदल यात्रा में बदल दिया गया। जिसका नाम रखा गया “गांधी से अंबेडकर’, जो गांधी मैदान से हाईकोर्ट तक जानी थी। रैली में कांग्रेस, राजद, भाकपा माले, भाकपा, वीआईपी, जन अधिकार पार्टी के नेताओं ने हिस्सा लिया।
वोट चोरी एटम बम, अब आएगा हाइड्रोजन बम
सोमवार को पहले गांधी मैदान में बापू की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और बाद में रैली आगे बढ़ी। रैली में बड़ी संख्या में लोग होने के लगभग दो किलोमीटर की यात्रा तीन घंटे में पूरी कर लोग डाकबंगला चौराहा पहुंचे जहां राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत अन्य नेताओं ने मंच से अपनी बात रखी।
सोमवार को समापन सभा के दौरान राहुल गांधी ने डाकबंगला चौराहे पर मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि ‘अभी तो वोट चोरी का एटम बम आया है, अब मैं ऐसा हाइड्रोजन बम लाऊंगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता में चेहरा नहीं दिखा पाएंगे’।

भाजपा पर आरोप लगाते हुए राहुल ने कहा कि ‘बीजेपी चुनाव आयोग के साथ मिलकर लोगों के अधिकारों को खत्म कर रही है। वोट चोरी का मतलब होगा आरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अधिकार की चोरी।
यात्रा की शुरुआत सासाराम से हुई। जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। कांग्रेस से वरिष्ठ नेता बाबू जगजीवन राम इसी जिले से ताल्लुक रखते थे।
1300 किलोमीटर तक चली इस रैली में अलग-अलग जिलों में इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने हिस्सा लिया। जिसमें दरभंगा में प्रियंका गांधी, मुजफ्फरपुर में एम के स्टालिन, आरा में अखिलेश यादव, तेलगांना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, पश्चिम बंगाल के सांसद यूसुफ पठान, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यसभा सांसद संजय राउत शामिल थे।
पूरी यात्रा के दौरान कई चीजें देखने को मिलीं। कहीं राहुल गांधी लोगों से मिल रहे तो कहीं बुलेट पर यात्रा कर रहे। मधुबनी में मखाना किसानों से मिले। कई जगह वोट चोरी के अलावा अलग मुद्दों पर अपनी बात रखी।
अब यात्रा समाप्त हो चुकी है। इसका आऩे वाले चुनाव पर क्या असर होगा इसके लिए हमने दो सीनियर जर्नलिस्ट से बातचीत की है।
16 दिनों तक चली इस यात्रा का जनता पर कितना असर होगा?
नचिकेता नारायण के अनुसार “ इस रैली में दो महत्वपूर्ण बातें हुई हैं पहली महागठबंधन में लोकसभा चुनाव के बाद जो बिखराव था वह कहीं न कहीं खत्म हुआ है। दूसरी राहुल गांधी के साथ पिछले कई सालों से इमेज क्राइसिस की जो समस्या थी वह भारत जोड़ो यात्रा और वोट अधिकार यात्रा के दौरान खत्म हुई है। अब राहुल गांधी को लोग गंभीर भाव वाले नेता के तौर पर देख रहे हैं”।

विधानसभा से पहले इस तरह की रैली में लोगों का जुटान कहीं न कहीं महागठबंधन के लिए एक अच्छा संकेत है लेकिन मतदान में कितना तब्दील होगा यह समय ही बताएगा।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह ने हमें बताया कि ‘चुनाव से पहले इस तरह की रैली ने महागठबंधन को एक गति दी है। जो चुनाव के लिए बहुत ही जरुरी थी। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी ने 10 लाख रोजगार के मुद्दे को उठाया था। जिसके बाद चुनाव में एक कड़ी टक्कर देखने को मिली, नतीजा चुनाव में राजद सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरा। उसी तरह स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन का मुद्दा महागठबंधन के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है’।
वह साथ ही कहते हैं इसने महागठबंधन के सभी दलों की उम्मीदों को बढ़ा दिया है। अब बात यह है कि जिस तरह से वोट चोरी के डाटा को बताया जा रहा है। अगर उन लोगों तक पार्टी के लोग पहुंच रहे हैं तो इसका फायदा महागठबंधन को ज़रूर मिलेगा।
इस रैली से कांग्रेस को कितना फायदा होगा?
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। जिसमें 19 सीटों पर ही जीत मिली थी। महागठबंधन द्वारा हार का ठीकरा भी कांग्रेस पर फोड़ा गया था। इस रैली से कांग्रेस को कितना फायदा होगा इस पर संतोष सिंह कहते हैं ‘इस रैली से पहले कांग्रेस बिहार में इतनी दिखाई नहीं देती थी। लेकिन इससे कांग्रेस की दृश्यता तो बढ़ी है। रैली में सबसे अधिक कांग्रेस के झंडे दिखाई दिए हैं। जहां से भी रैली पार हुई है वहां यही नजारा था। जबकि राजद बिहार में बड़ी पार्टी है। इससे साफ है कि भले ही लोग राहुल गांधी को देखने आएं हो, लेकिन रैली का प्रभाव तो ज़रुर बढ़ा है।
इस रैली के दौरान यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने राजद से ज्यादा जगह ली है। क्या आंतरिक तौर पर कुछ मनमुटाव है?
संतोष सिंह कहते हैं फिलहाल इस तरह का कोई मनमुटाव दिखाई नहीं दे रहा है। क्योंकि रैली का आयोजन कांग्रेस की तरफ से किया गया था। इसलिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया है। लेकिन चुनाव के दौरान जब सीटों का बंटवारा होगा उस वक्त सीटों को लेकर टकराहट हो सकती है।
वह कहते हैं फिलहाल कांग्रेस अच्छी स्थिति में आ गई है। इसलिए सीट बंटवारे के दौरान पार्टी पर किसी तरह का दबाव नहीं हो सकता है। क्योंकि राजद को भी पता है कि बिहार में मोदी के खिलाफ राहुल गांधी को लाना होगा।
इसके पीछे की वजह भी एकदम साफ है नीतीश कुमार उस स्थिति में नहीं हैं कि वह एनडीए गठबंधन को लीड कर पाए और जदयू में अन्य कोई ऐसा बड़ा नेता नहीं है जिसे जनता सुनना चाहती हो। इस हिसाब से देखा जाए तो यह पहला ऐसा चुनाव होगा जो विधानसभा नहीं बल्कि लोकसभा की तरह लड़ा जाएगा।
वहीं नचिकेता नारायण का कहना है कि ‘ऐसा नहीं है कि रैली के दौरान तेजस्वी को पीछे कर दिया गया है। वह हर जगह दिखाई दिए हैं। चूंकि रैली का आयोजन कांग्रेस की तरफ से किया गया था और मामला एसआईआर का है कांग्रेस पहले दिन से ही इस पर काम कर रही है। एसआईआर धीरे-धीरे पूरे देश में करवाया जाएगा इसकी शुरुआत बिहार से हुई है। यह देशव्यापी मुद्दा होने वाला है इसके लिए लीडर भाई देश स्तर का चाहिए था। इसलिए मनमुटाव की कोई बात नहीं है। क्योंकि कांग्रेस को भी पता है राज्य में उऩकी स्थिति कैसी है। ऐसे में अकेले चुनाव लड़ना सही नहीं है। इससे पहले जब भी अकेले चुनाव लड़े हैं दोनों पार्टियों को नुकसान ही हुआ है।
महागठबंधन में लेफ्ट संगठनों की रैली में कितनी भूमिका रही और वोट पर इसका कितना असर पड़ेगा?
संतोष सिंह के अनुसार लेफ्ट में भाकपा माले की उपस्थिति हर जगह दिखाई दी है। रैली के दौरान लेफ्ट की महिलाओं की अच्छी खासी संख्या थी। इस बार लोकसभा में माले दो सीटें जीती है जिसके कारण सीवान, छपरा की तरफ संगठनों को मजबूती मिली है। जिसके कारण सीटों के बंटवारे में हो सकता है माले की हिस्सेदारी प्रदर्शन के हिसाब से बढ़ाई जाए।
वहीं नचिकेता नारायण के अऩुसार ‘एसआईआर और वोट चोरी के मामले में लेफ्ट के कार्यकर्ताओं ने ग्राउंड पर बहुत काम किया है। पार्टी के कार्यकर्ता के पास हर तरह का डेटा मौजूद है। उन्होंने इसके खिलाफ याचिका भी दायर की थी। जिसके कारण लोगों के बीच भरोसा बढ़ा है। जिससे माले को काफी मजबूती मिली है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार माले 30 से ऊपर सीटों की मांग करेगा।
इसके साथ ही यह भी देखने वाली बात है पूरी रैली में माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य राहुल गांधी के साथ दिखाई दिए हैं। जो माले के लिए सीट के बंटवारे के लिए एक अच्छा संकेत है।
रैली में जितने लोगों की उम्मीद की गई थी वह आए?
नचिकेता नारायण के अनुसार यह एक रैली थी सभा होती तो बात अलग थी। पटना में बहुत सारी सभाएं हुई हैं। जिसमें बड़ी संख्या में लोग आएं हैं। ऐसे में रैली के हिसाब से देखा जाए तो लोगों की अच्छी खासी भीड़ थी। उसमें भी लेफ्ट संगठन के लोगों की संख्या ज्यादा थी। आने वाले चुनाव के हिसाब से यह एक अच्छा संकेत है। जहां एक ओर पूरे देश में यह माना जा रहा है कि लेफ्ट खत्म हो गया है वहीं बिहार में इसका कैडर मजबूत हो रहा है।
मंच से मोदी की मां को गाली देने का कितना असर होगा?
नचिकेता नारायण के अऩुसार- जिस वक्त यह घटना हुई मंच पर कोई भी बड़ा नेता नहीं था। अगर होता तो इस प्रकार की घटना नहीं होती। बाकी कई बार लोग कार्यक्रम खत्म होने के बाद नेताओं को अपशब्द कहते हैं। सोशल मीडिया के जमाने में किसी ने इसे रिकॉर्ड कर वायरल कर दिया। यह बैठे-बिठाए बीजेपी को एक मौका मिल गया है, जिससे वह विपक्ष पर वार कर रही है। इस घटना के बाद भाजपा के नेता लगातार मोदी की मां को गाली दी है इस मुद्दा बना रहे हैं। जाहिर है इससे एक गलत संदेश तो गया है।
(पटना से पूनम मसीह की रिपोर्ट)