गवई पर जूता फेंकने की कोशिश : आरोपी वकील पर अवमानना कार्यवाही की मंज़ूरी

अटॉर्नी जनरल (एजी) आर. वेंकटरमणि ने एडवोकेट राकेश किशोर के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने की सहमति दी है, जिन्होंने पिछले सप्ताह कोर्ट रूम में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बी.आर. गवई पर कथित तौर पर जूता फेंकने की कोशिश की थी।

सुप्रीम कोर्ट बार के अध्यक्ष, सीनियर एडवोकेट विकास सिंह और सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने संयुक्त रूप से दूसरे सीनियर जज जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और आपराधिक अवमानना मामले को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

विकास सिंह ने पीठ को सूचित किया कि एजी ने मंज़ूरी दे दी है और उन्होंने इसे शुक्रवार को सूचीबद्ध करने की मांग की। एसजी तुषार मेहता ने इस तथ्य की पुष्टि करते हुए कहा, “माननीय एजी ने सहमति दे दी है। मैं भी अपने मित्र के साथ शामिल होता हूं और योर लॉर्डशिप से अवमानना पर विचार करने का अनुरोध करता हूं। यह संवैधानिक अखंडता का मामला है, जिस पर प्रश्न उठाया जा रहा है।”

विकास सिंह ने यह भी कहा कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवरुद्ध करने के लिए जॉन डो आदेश की भी मांग कर रहे हैं।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने सवाल किया कि क्या इस मुद्दे को और आगे बढ़ाना चाहिए, यह बताते हुए कि सीजेआई ने स्वयं इस घटना को माफ़ कर दिया है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “माननीय सीजेआई अत्यंत उदार रहे हैं। यह दर्शाता है कि संस्था इस तरह की घटनाओं से प्रभावित नहीं होती है।”

इसके जवाब में विकास सिंह ने कहा कि जिस तरह से यह घटना सोशल मीडिया पर जारी है और प्रचार पा रही है, उससे संस्था को कुछ नुकसान हो रहा है।

मेहता ने सीजेआई के इस कृत्य को महिमा की अभिव्यक्ति बताया लेकिन कहा कि कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया का उपयोग करके इस घटना को सही ठहराना चिंता का विषय है। उन्होंने इसे संस्थागत अखंडता का मामला बताया।

विकास सिंह ने कहा कि छह अक्टूबर को हुई इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अनगिनत सामग्री प्रसारित हुई है, जो संस्थागत अखंडता और गरिमा को ठेस पहुंचा रही है।

मेहता और सिंह ने अदालत से सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री पोस्ट करने पर रोक से संबंधी आदेश पारित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि हर तरह की अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं।

पीठ ने कहा कि भाषण और अभिव्यक्ति का मौलिक अधिकार दूसरों की गरिमा की कीमत पर नहीं हो सकता है। इसने सोशल मीडिया की ‘‘अनियमित’’ प्रकृति के दुष्प्रभावों की ओर इशारा किया और कहा, ‘‘हम सामग्री के उत्पाद और उपभोक्ता दोनों हैं’’।

मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने के प्रयास की यह अभूतपूर्व घटना छह अक्टूबर को हुई। उस दिन सुबह करीब 11:35 बजे अदालत कक्ष संख्या-एक में 71-वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर ने अपने जूते उतारकर उन्हें प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ की ओर फेंकने का प्रयास किया। सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी अधिवक्ता को तुरंत हिरासत में ले लिया।

अदालती कार्यवाही के दौरान हुई इस घटना से अविचलित प्रधान न्यायाधीश ने अदालत के अधिकारियों और अदालत कक्ष में मौजूद सुरक्षाकर्मियों से इसे नजरअंदाज करने और राकेश किशोर नामक दोषी वकील को चेतावनी देकर छोड़ देने को कहा।

जस्टिस बागची ने सवाल किया कि क्या इस मुद्दे को फिर से उठाने से प्रचार चाहने वालों को और अवसर नहीं मिलेगा। जस्टिस बागची ने कोर्ट के समय के अन्य प्राथमिकता वाले मामलों से भटकने पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा “जिस क्षण आप अब कोई कार्रवाई करेंगे, वह एपिसोड नंबर 2 बन जाएगा।” विकास सिंह ने हालांकि ज़ोर देकर कहा कि आरोपी किशोर ने अपने कृत्य पर कोई पश्चाताप व्यक्त नहीं किया और वह अपने कृत्य का महिमामंडन करते हुए बयान दे रहा है।

पीठ ने इस मामले को दिवाली की छुट्टियों के बाद कोर्ट खुलने पर सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की। विकास सिंह ने कहा कि वह बार (वकीलों की संस्था) की नाराज़गी व्यक्त कर रहे थे और उन्होंने पिछले सप्ताह जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी का उल्लेख किया, जिन्होंने इस घटना को संस्था पर अपमान करार दिया था।

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