फलटण में डॉ. संपदा मुंडे की आत्महत्या के मामले में स्त्री मुक्ति लीग, महाराष्ट्र की ओर से पुणे में गुरुवार (30 अक्टूबर को) प्रदर्शन किया गया।
डॉ. मुंडे की आत्महत्या को “संस्थानिक हत्या” करार देते हुए उन्हें न्याय देने की मांग की गई।
फलटण उपजिला अस्पताल में कार्यरत डॉ. संपदा ने आत्महत्या से पूर्व अपनी हथेली पर लिखा था, “मेरी मौत का कारण पुलिस उप निरीक्षक गोपाल बदने है जिसने मेरे साथ चार बार बलात्कार किया। इसके अलावा प्रशांत बनकर ने भी शारीरिक, मानसिक प्रताड़ना दी।”
इससे पूर्व जून में पुलिस उपाधीक्षक से की शिकायत में उन्होंने कहा था कि उन पर पुलिस द्वारा एक पीटे गए व्यक्ति को फिटनेस सर्टिफिकेट देने के लिए दबाव डाला जा रहा था। उसमें उन्होंने तीन पुलिस अधिकारियों के नाम भी दिए थे। एक चार पृष्ठों के पत्र में भाजपा के पूर्व सांसद और उनके दो निजी सहायकों का नाम भी डॉ. संपदा ने लिया था।
स्त्री मुक्ति लीग ने इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर दोषियों को सजा दिलाने, पूर्व सांसद रंजीत सिंह निमबालकर और उनके सहायकों की भूमिका की जांच करने, डॉक्टरों समेत सभी महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल पर सुरक्षा मुहैया कराने, डॉक्टरों समेत स्वास्थ्यकर्मियों के कार्यघंटे घटाकर आठ घंटे निर्धारित करने, कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न विरोधी समितियाँ स्थापित करने और मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस, जिनके पास गृह विभाग भी है, के इस्तीफे की मांग की।