अहमदाबाद। सुरेन्द्रनगर ज़िले के चर्चित ज़मीन घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद गुजरात की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज़ हो गई है। इस मामले में ज़िला कलेक्टर डॉ. राजेश पटेल और उप-राजस्व अधिकारी चंद्र सिंह मोरी के ठिकानों पर छापेमारी के बाद मोरी समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। छापों के तुरंत बाद तत्कालीन कलेक्टर डॉ. राजेश पटेल का तबादला कर उन्हें पद से हटाया गया और ज़िला विकास अधिकारी एस. याग्निक को कलेक्टर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।
हालांकि उस समय डॉ. राजेश पटेल की गिरफ्तारी नहीं की गई थी, जिस पर कई सवाल उठे थे। राजेश पटेल पाटीदार समुदाय से आते हैं, जो गुजरात में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। इसी कारण यह चर्चा भी हुई कि समुदाय के दबाव के चलते ईडी ने उन्हें तत्काल गिरफ्तार नहीं किया। इस मुद्दे को सबसे पहले ‘जनचौक’ ने उठाया था, जिसके बाद स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर भी यह बहस तेज़ हो गई थी कि पाटीदार होने के कारण उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है।
मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार ईडी ने 2 जनवरी को डॉ. राजेश पटेल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर दिल्ली ले जाया गया। पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
इस बीच, भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे 2015 बैच के आईएएस अधिकारी राजेश पटेल के समर्थन में पाटीदार आंदोलन से उभरे नेता और भाजपा नेता वरुण पटेल खुलकर सामने आ गए हैं। वरुण पटेल न केवल राजेश पटेल का बचाव कर रहे हैं, बल्कि उन्हें “पाटीदार समाज का बेटा” बताते हुए आंदोलन भी चला रहे हैं।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में वरुण पटेल ने कहा, “हम यह नहीं कहते कि कानून या कोर्ट गलत है, सच्चाई है कि सुरेन्द्रनगर में नॉन एग्रीकल्चरल के नाम पर पैसा लिया जाता रहा है। एक मुस्लिम फरियादी की शिकायत पर एक पाटीदार अधिकारी को हिन्दूवादी सरकार द्वारा जेल भेज दिया गया है, यह हमें स्वीकार नहीं। अगर एनए के नाम पर पैसा लेना अपराध है, तो गुजरात में ऐसा कौन सा कलेक्टर है जो यह नहीं करता?”
उन्होंने मंच से लोगों से पूछा कि क्या किसी ने बिना रिश्वत दिए एनए करवाया है। जवाब में भीड़ से ‘नहीं’ की आवाज़ें आईं। इसके बाद वरुण पटेल ने दावा किया कि गुजरात के हर ज़िले में एनए के नाम पर भ्रष्टाचार होता है।
वरुण पटेल 2015 के पाटीदार आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और वर्तमान में भाजपा से जुड़े हैं। उनके इस बयान और गतिविधियों के बाद गुजरात की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। हालांकि भाजपा नेतृत्व ने अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है।
पाटीदार आंदोलन समिति के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राजेश पटेल की गिरफ्तारी भ्रष्टाचार के मामले में हुई है, लेकिन वरुण पटेल समेत कई नेता राजनीतिक सौदे के तहत भाजपा में शामिल हुए थे। कथित तौर पर उन्हें टिकट और अन्य लाभों का आश्वासन दिया गया था, जो पूरा नहीं हुआ। अब ये नेता राजनीतिक हाशिए पर पहुंच चुके हैं और अपने अस्तित्व के लिए इस मुद्दे को उठा रहे हैं।
‘जनचौक’ से बातचीत में वरुण पटेल ने कहा कि मांडल में मैरिज एक्ट, ईडब्ल्यूएस और राजेश पटेल की गिरफ्तारी के विरोध में सम्मेलन आयोजित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में पाटीदार समाज को कमजोर करने की कोशिश हो रही है और गैर-गुजराती अधिकारियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “राजेश पटेल को भ्रष्टाचारी कहना और गैर-गुजराती अधिकारियों को बचाना सही नहीं है। पहले गुजरात की सत्ता में ठाकोर, क्षत्रिय और ब्राह्मण समुदाय का प्रतिनिधित्व होता था, आज उनकी संख्या क्या रह गई है? इसी तरह पाटीदारों को भी हाशिए पर धकेला जा रहा है।”
गौरतलब है कि गुजरात में ज़ावेरी आयोग की सिफारिशों के आधार पर स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनाव में पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है, जिसका कुछ सामान्य वर्गों द्वारा विरोध किया जा रहा है। वरुण पटेल भी इस आरक्षण के मुखर विरोधियों में शामिल हैं।
वहीं, सुरेन्द्रनगर ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष नौशाद सोलंकी का कहना है कि इस मामले में फरियादी मुस्लिम नहीं बल्कि हिंदू है। उनके अनुसार, वरुण पटेल राजनीतिक लाभ के लिए इस मामले को हिंदू-मुस्लिम रंग दे रहे हैं ताकि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
(कलीम सिद्दीकी पत्रकार और एक्टिविस्ट हैं।)