उफ़ मेरे देश में ऐसे भी लोग हैं जो जम्मू में स्थित श्री माता वैष्णव देवी मेडिकल कॉलेज बंद होने पर जश्न मना रहे हैं। सारे हिंदू सो रहे हैं। माता वैष्णव देवी नामधारी मेडिकल कालेज बंद हो गया।
जब जश्न संघ और भाजपाई मनाएं तो समझ लीजिए कोई बड़ी बात ज़रूर है। इसलिए हिंदू संगठन चुप्पी साधे हुए हैं। आम तौर पर किसी भी नगर में मेडिकल कालेज खुलने पर खुशियां मनाई जाती हैं लेकिन ये उलटबांसी यहां क्यों? इसे खोलने वालों ने ही इसे साजिशन बंद कराया है।
बात दरअसल यह है कि इस कालेज में जिन छात्रों का एमबीबीएस में चयन हुआ उनमें मुस्लिम छात्रों की बहुलता है। ये भला संघी सरकार कैसे बर्दाश्त कर सकती है इसलिए कुछ ना कुछ तो करना ही था। ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी।
इसलिए भारत के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने मंगलवार को गंभीर ख़ामियों का हवाला देते हुए जम्मू के कटरा में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल एक्सीलेंस को दी गई मेडिकल कोर्स एमबीबीएस संचालित करने की अनुमति रद्द कर दी।
ये इस मेडिकल कॉलेज का पहला एमबीबीएस बैच था। श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति दी गई थी।
यह कॉलेज का पहला बैच था, जिसमें कुल 50 छात्रों ने दाखिला लिया। छात्रों ने नीट परीक्षा के आधार पर प्रवेश लिया था और पढ़ाई भी शुरू हो चुकी थी। अचानक अनुमति वापस लेने का फैसला कॉलेज के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। इस मेडिकल कॉलेज को चार महीने पहले मिली एमबीबीएस की मंजूरी को NMC ने अचानक वापस ले लिया, जिससे छात्र और स्टाफ संकट में आ गए हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के फैसले ने न सिर्फ कॉलेज प्रशासन को, बल्कि छात्रों और शिक्षकों को भी गहरी चिंता में डाल दिया है। इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
विदित हो, कॉलेज में दाखिले के बाद से ही कुछ संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया था। पहले एमबीबीएस बैच में शामिल 50 छात्रों में से 44 छात्र मुस्लिम समुदाय से थे। इसे लेकर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने आपत्ति जताई। समिति का कहना था कि यह कॉलेज माता वैष्णो देवी मंदिर की दान राशि से बना है, इसलिए यहां कश्मीर के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन किए गए।
फिर क्या था, 2 जनवरी को NMC की टीम ने कॉलेज का अचानक निरीक्षण किया। कॉलेज के अधिकारियों का दावा है कि निरीक्षण वाले दिन OPD में 400 से ज्यादा मरीज आए थे, लेकिन रिपोर्ट में यह संख्या काफी कम दिखाई गई बेड की भराव दर और डिलीवरी के मामलों को भी गलत तरीके से पेश किया गया। कॉलेज अधिकारियों का कहना है कि नए साल के आस-पास मरीजों की संख्या वैसे भी कम हो जाती है, जिसे नजरअंदाज किया गया।
इस जांच से कॉलेज के कई डॉक्टर और कर्मचारी फैसले से बेहद निराश हैं। उनका कहना है कि उन्होंने बेहतर अवसर छोड़कर इस नए संस्थान को मजबूत बनाने का फैसला किया था। अब अचानक अनुमति रद्द होने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है। कई शिक्षकों ने कहा कि इस फैसले में उनकी मेहनत और योगदान को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। श्री माता वैष्णो देवी कॉलेज की मान्यता रद होने पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का रिएक्शन सामने आया है। मान्यता रद्द होने पर जश्न और खुशियां मना रहे लोगों की भी सीएम ने आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इन छात्रों को समीपवर्ती कालेजों में एडजस्ट किया जाए।
जम्मू की इस सुविधा को ख़त्म किए हैं वे कितने हिंदू हितैषी होंगे। क्योंकि ये मेडिकल कॉलेज जम्मू-कश्मीर की अवाम के लिए हितकर होता। वैसे भी जम्मू में हिंदू आबादी को ख्याल में रखते हुए ही यह मेडिकल कालेज मां वैष्णव के नाम से खोला गया होगा। अब नीट जैसे एग्ज़ाम में हिंदू चयनित नहीं हो पाए तो दोषी कौन? वैष्णव देवी माता समिति का विरोध कतई जायज़ नहीं है। जम्मू की अवाम को इसे मुद्दा बनाना चाहिए। संघ और भाजपा के मेडिकल कालेज बंद होने पर जश्न की निंदा भी करना चाहिए। कब तक संघी साज़िश के शिकार होंगे हिंदू।
(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)