गुजरात कॉंग्रेस की “जन आक्रोश यात्रा” का तीसरा चरण 2 फरवरी से

अहमदाबाद: गुजरात प्रदेश कांग्रेस द्वारा राज्यभर में जन समस्याओं और सरकार के खिलाफ जन आक्रोश को आवाज़ देने के लिए शुरू की गई ‘जन आक्रोश यात्रा – परिवर्तन का शंखनाद’ अब अपने तीसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है। इस चरण की शुरुआत सोमवार, 2 फरवरी को दक्षिण गुजरात के वलसाड–कपराडा से होगी। 

इससे पहले गुजरात काँग्रेस ने उत्तर और मध्य गुजरात की जन आक्रोश यात्रा कर जनता के मुद्दों पर जनता तक पहुंचने का प्रयास किया था। किसानों की क़र्ज़ माफ़ी और बेमौसम बरसात से हुए फसली नुकसान के मुआवजे के लिए गुजरात कॉंग्रेस ने सौराष्ट्र में किसान आक्रोश यात्रा की थी जिसके बाद गुजरात सरकार ने किसानों को फसली नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया था।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, इससे पहले उत्तर गुजरात में निकली जन आक्रोश यात्रा और किसानों के मुद्दों को लेकर आयोजित किसान आक्रोश यात्रा को जनता का व्यापक समर्थन मिला था।

उत्तर गुजरात में अवैध शराब, ड्रग्स बेरोज़गारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे केंद्र में रहे थे।

जबकि किसान आक्रोश यात्रा के दौरान क़र्ज़ माफ़ी और बेमौसम बरसात से हुए फसली नुकसान के मुआवजे , किसानों से जुड़े सवाल उठाए गए थे।

इन्हीं आंदोलनों से बने जन दबाव के बीच अब कांग्रेस दक्षिण गुजरात में सरकार के खिलाफ आंदोलन को और धार देने जा रही है।

अब तक अनुमानित  2700 किलोमीटर की यात्रा कॉंग्रेस कर चुकी है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज डॉक्टर मनीष दोशी  ने बताया कि “यात्रा के पहले दो चरणों में 14 जिलों को कवर किया गया, 72 जनसभाएं आयोजित हुईं थीं, 350 से अधिक स्वागत बिंदु बनाए गए, युवाओं के साथ बाइक रैलियां निकाली गईं। करीब 2700 किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता का गुस्सा खुलकर सामने आया।”

दक्षिण गुजरात पर फोकस तीसरे चरण में लगभग 1100 किलोमीटर की यात्रा वलसाड, नवसारी, डांग, तापी, सूरत, भरूच और नर्मदा जिलों के गांवों और शहरों से होकर गुज़रेगी। यात्रा के दौरान जन संवाद कार्यक्रम, किसान और युवा संवाद, बाइक रैलियां, सार्वजनिक सभाएं आयोजित की जाएंगी। रोज़गार संकट और उद्योगों की मंदी बड़ा मुद्दा होगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि “दक्षिण गुजरात गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। सूरत, भरूच, वलसाड और तापी में छोटे और मध्यम उद्योगों के बंद होने से हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए हैं। खासकर हीरा और टेक्सटाइल उद्योग की मंदी ने कामगारों और उनके परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। आदिवासियों के अधिकार छीने जा रहे हैं”

अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आदिवासी समाज के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकारों को कमजोर कर रही है। डांग, तापी और नर्मदा जैसे इलाकों में आज भी स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पीने के पानी और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. तुषार चौधरी ने कहा कि किसान आक्रोश यात्रा के दौरान उठाए गए मुद्दे आज भी जस के तस हैं। किसानों को न तो पर्याप्त पानी मिल रहा है और न ही फसलों का उचित मूल्य। वहीं भरूच और अंकलेश्वर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण से कैंसर और सांस की बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं।

तीसरे चरण की शुरुआत कांग्रेस महासचिव एवं गुजरात प्रभारी मुकुल वासनिक, प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा, नेता प्रतिपक्ष डॉ. तुषार चौधरी, राष्ट्रीय आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया सहित वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में होगी।

जन आक्रोश यात्रा, किसान आक्रोश यात्रा और अब दक्षिण गुजरात का यह चरण—तीनों मिलकर राज्य में परिवर्तन की ज़मीन तैयार कर रहे हैं। पार्टी ने साफ किया है कि जनता के अधिकार, न्याय और भविष्य की लड़ाई को और तेज़ किया जाएगा।

(कलीम सिद्दीकी वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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