दिल्ली। राजधानी के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों और मजदूर बस्तियों में लेबर कोड कानूनों के खिलाफ बुलायी गई हड़ताल के समर्थन में मजदूर संगठनों ने जुलूस और सभाएं की। हड़ताल का आह्वान संयुक्त रूप से केंद्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों, कर्मचारी फेडरेशनों और संयुक्त किसान मोर्चा ने किया था।
ज्ञात हो कि 21 नवंबर 2025 को केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिताओं को लागू करने का नोटिफिकेशन जारी किया था जिसके खिलाफ ऐक्टू समेत सभी मजदूर संगठनों ने 26 नवंबर को भी देशभर में विरोध प्रदर्शन किया था। इन श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद 29 जरूरी श्रम कानून खत्म हो जाएंगे जिनमें न्यूनतम मजदूरी, भविष्य निधि, ट्रेड यूनियन बनाने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान थे।
दिल्ली के नरेला, वजीरपुर, ओखला, झिलमिल, मंगोलपुरी समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों ने हड़ताल में की हिस्सेदारी
आज की हड़ताल से दिल्ली के कई औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हुआ और लगभग सभी औद्योगिक क्षेत्रों ने ट्रेड यूनियन संगठनों ने हड़ताल के लिए बड़े जुलूस आयोजित किए, जिनमें भारी संख्या में मजदूरों ने हिस्सेदारी की। रेहड़ी–खोखा–पटरी वालों ने राजघाट पर प्रदर्शन किया। बैंक कर्मचारियों के अलावा कई सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों ने भी आज के हड़ताल में पूरी भागीदारी की।
जंतर मंतर पर दिखा मजदूरों का गुस्सा : कृषि कानूनों के तरह ही श्रम कोड कानूनों के खिलाफ देशभर में चलेगा आंदोलन
दोपहर 2 बजे ऐक्टू , एटक, सीटू, एचएमएस, सेवा, इंटक, एआईयूटीयूसी, सेवा, एलपीएफ मजदूर एकता केंद्र, टीयूसीसी आदि तमाम केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। श्रम कोड कानून को वापस लेने की मांग के साथ निर्माण मजदूरों, घरेलू कामगार महिलाओं समेत कई अन्य मजदूरों ने जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में भाग लिया।
*सामाजिक सुरक्षा को छीनने वाली मोदी सरकार को देश के मजदूर देंगे करारा जवाब*
ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस(ऐक्टू) के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड राजीव डिमरी ने जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि श्रम कानूनों को खत्म करके श्रम–कोड, इस देश के मजदूरों को गुलाम बनाने के लिए लाए गए हैं। श्रम कोड, निजीकरण, ठेका–व्यवस्था जैसे मुद्दों के ऊपर मोदी सरकार किसी भी तरह की बहस से मुंह चुरा रही है और मीडिया में भ्रामक प्रचार के सहारे मजदूरों को छलने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि देश के सभी राज्यों से हड़ताल को मजदूरों और किसानों का भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ है।
सभा की समाप्ति करते हुए सभी श्रमिक नेताओं ने श्रम कोड कानूनों को खत्म करने, बिजली क्षेत्र के निजीकरण, मनरेगा को खत्म करने के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने की बात कही।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)