पुणे। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बोर्ड ऑफ़ पीस के ख़िलाफ़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित इसराइल यात्रा रद्द करने की माँग को लेकर इंडियन पीपल इन सॉलिडेरिटी विद फ़िलिस्तीन (आईपीएसपी) और बीडीएस इंडिया के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों की शृंखला में पुणे में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और बाद में पुलिस ने मामला भी दर्ज किया।
आईपीएसपी के सोशल मीडिया में जारी बयान के अनुसार उनके कार्यकर्ता जेएम रोड, संभाजी पार्क फुटपाथ पर जमा हुए थे, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और छह घंटे से ज़्यादा डेक्कन जिमख़ाना थाने में बिठाए रखने के बाद रिहा किया।
मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने 23 कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ बिना अनुमति प्रदर्शन कर कानून व व्यवस्था की स्थिति पैदा करने और पुलिस के लिखित तथा मौखिक निर्देशों के बावजूद नारेबाजी करने और सार्वजनिक फुटपाथ पर लोगों की आवाजाही बाधित करने के प्रयासों के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(2), 190, 191(1), 126(2), 223 और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(3), 135, 111 के तहत मामला दर्ज किया है।
आईपीएसपी ने आरोप लगाया है कि पुलिस के बलप्रयोग में कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें भी आई हैं। आईपीएसपी ने कहा कि प्रदर्शन की अनुमति के लिए पुलिस को आवेदन दिया गया था लेकिन पुलिस ने ऐन समय अनुमति देने से इनकार कर दिया और फिर प्रदर्शन शुरू होते ही प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बलप्रयोग की कार्रवाई की। आईपीएसपी ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से पुलिस का नागरिकों के लिए यही संदेश जाता है कि उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का कोई अधिकार नहीं है।
आईपीएसपी ने सवाल किया है कि पुणे पुलिस को कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ बलप्रयोग के आदेश किसने दिए?
प्रदर्शन दिल्ली के जंतर मंतर समेत देश के कुछ और स्थानों पर भी हुए।
(जनचौक ब्यूरो)