ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया 

बड़े बुजुर्गों का यह कहना कितना समीचीन है कि दोस्ती और यारी या कहें प्यार सोच समझ कर करना चाहिए वरना इसका अंजाम बुरा होता है। कुछ ऐसा ही हाल भारत की वर्तमान सरकार का हुआ है। याद कीजिए जब 2013 में पहले दफ़े भ्रष्टाचार के सुनियोजित आयोजन जिसका नेतृत्व संघ से जुड़े एक स्वनाम धन्य बुजुर्ग अन्ना हज़ारे ने किया। उनके साथ बाबा रामदेव, किरन बेदी, अरविंद केजरीवाल जैसे लोग जुटे तो सहज ही आम लोगों ने इन ईमानदार लोगों का यकीन कर भाजपा को देश की सत्ता सौंप दी। लेकिन वे तब से आज तक मोदी जी की मोहब्बत में फंसे रहे।

इस बीच वादे जुमला हुए, महंगाई बढ़ी, देश की सम्पत्ति बेचकर अडानी-अंबानी का कद विश्व पटल पर बढ़ाया। नैतिकताएं समाप्त होती रहीं। चीन ने ज़मीन हथिया ली। फिर भी भांड मीडिया और मोदी जी की मोहब्बत का ऐसा ताल मेल जुड़ा कि सच्चाई बताने वाले सच्चे लोग जेल जाने लगे।दहशत ऐसी छायी कि कांग्रेस और दलों में भगदड़ मंच गई। विपक्ष ख़त्म करने और सरकारें गिराने का असंवैधानिक काम धड़ल्ले से चला। लेकिन इस प्रेम की जड़ें इतनी कसकर, मुफ्त राशन, महिलाओं को फोकट में हर महीने कई हज़ारों हज़ार करोड़ों बांटकर मज़बूत की गई कि अवाम आज भी इस प्रेम में जकड़ी हुई है। एकतरफा प्रेम ख़तरनाक होता है।

ठीक वैसे ही जैसे हमारे साहेब जी डोनाल्ड ट्रंप के बाहुपाश में जकड़े हुए हैं। इसलिए उनकी हां में हां मिलाना जारी है तुम यदि दिन को रात कहो तो मैं भी कहूंगा। डोनाल्ड ट्रंप कौन है इसका कच्चा चिट्ठा अमेरिका की अदालत ने सबके सामने ला दिया है। कहा जाता है जो जैसा होता है वो वैसा ही साथी तलाश लेता है। हो सकता है गुजरात नरसंहार के बाद से ही एपस्टीन की नजर में ये आ गए हों क्योंकि इस दौरान जैसी अमानवीय और घृणास्पद कांड हुए वे जेफ्री की पसंद भी थे। इसलिए यह याराना पुराना लगता है। क्योंकि यह सब सत्ता में आते ही एकदम कैसे संभव हो सकता है।

फिर भारतीय विदेश नीति की परवाह किए बिना डोनाल्ड ट्रंप की यारी इतनी गाढ़ी हुई कि आगे क्या कहना। हाउ डी मोदी, नमस्ते ट्रंप सबको याद ही होगा। दूसरी बार साहेब तो जीत गए। डोनाल्ड ट्रंप गच्चा खा गए। साहेब ने पलटी मारी थी अब हिय का हार जो बाइडेन हो गए। इस बीच ट्रम्प ने रुठे प्रेमी की नज़र से देखना शुरू कर दिया। प्यारे दोस्त को साहेब जी भूल गए और वे तमाम एपस्टीन के साथ बिताए क्षण भी।

समय फिर बदला डोनाल्ड की वापसी हुई उसने साहेब को आमंत्रित नहीं किया। वे अपने रुठे यार से मिलने परमिशन लेकर गए। उनके साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ वहीं से साहेब के बुरे दिन शुरू हो गए। इसलिए जो मांगोगे सब मिलेगा करने के बावजूद बात बन नहीं रही। हाल ही में अमेरिका से ट्रेड डील ने देशवासियों खासकर किसानों के छक्के छुड़ा दिए हैं।

इसी तरह के बहुत से देश विरोधी काम ट्रंप साहेब से कराता रहेगा। क्योंकि उसके पास एक गौतम अडानी के अपराध का हथियार है दूसरी ओर एपस्टीन फाइल के रिकॉर्ड हैं जो साहेब का कैरियर ताप सकते हैं। ट्रम्प प्यारे दोस्त के हाथ में साहेब के और ना जाने कितने दस्तावेज़ भी  होंगे जैसे आम चुनाव में आर्थिक मदद, इज़राइल से ईवीएम का खेल और राहुल गांधी की हत्या का प्लान वगैरह-वगैरह।

साहेब फिलहाल अंदरूनी तौर पर बेहद परेशान हैं यह उनका चेहरा बता रहा है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी और प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी भी निरंतर साहेब जी की घेराबंदी किए हैं। वहीं आम जन में साहेब जी की साख पर बट्टा लग चुका है। कहा जा रहा है जब तक ट्रम्प हैं, साहेब सुरक्षित हैं ऐसा लगता है किंतु ऐसी मोहब्बत का अंजाम बुरा ही होना है ना ट्रम्प रहेंगे ना साहेब। इधर साहेब की मोहब्बत में फंसी जनता भी इस बारह साल के प्रेम बंधन को छोड़ने के लिए बेकरार है, छटपटा रही है।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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