विश्वगुरु आखिरकार सदन में पेश हुए शायद उन्हें पता चल गया था कि प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी सदन में नहीं रहेंगे। तीसरे सप्ताह भी चल रहे इज़राइल -अमेरिका ईरान युद्ध पर सहजता से बोल लेंगे। उन्हें उम्मीद थी कि उनके आका और फादर लैंड के लिए यह तो दो दिनों का खेल था। उन्हें नहीं मालूम था ईरान इतना शक्तिशाली निकलेगा और दुनिया के बड़े देश आका के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएंगे।यानि दोनों दोस्तों की हालत बिगड़ी हुई है। सीज़फायर में माहिर ग्रेट अमरीका इस तरह पिटेगा।
ईरान युद्ध विराम को तैयार नहीं। उधर मोदीजी का दिमाग देश की जनता ने भी खराब कर डाला। ईरान के समर्थन में लोग ऐसे उतरे कि मोदी, आका के आदेश की ही प्रतीक्षा में रहे, क्या कर सकते थे।चुप रहे। खामेनेई की मौत पर भी जुबां पर लंबे समय तक ताला लगा रहा। जब आका की पिटाई का ग्राफ बढ़ा तो मोदी का रुख थोड़ा परिवर्तित दिखा। प्रतिपक्ष नेता इस बीच सवाल दर सवाल करते रहे पर चुप्पी बरकरार रही।
कल वह समय आया और मोदी वही बोल रहे थे जो पिछले दिन राहुल ने कहा था। राहुल गांधी ये बता चुके थे कि आने वाले दिन देश के लिए बहुत संकटपूर्ण होंगे।आज प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी की बात से पहली बार उनकी अनुपस्थिति में सहमति दिखाई दी। क्योंकि अब वे भली-भांति समझ चुके हैं कि इज़राइल और अमेरिका की दोस्ती देश के लिए बहुत भारी पड़ने वाली है।
उधर ट्रम्प की सेनाओं ने इज़राइल के लिए ना लड़ने का ऐलान कर दिया है। नेतान्याहू से भी सम्बन्ध खराब हो चुके हैं। नाटो देश जिस पर अमेरिका गर्व करता था ईरान पर संयुक्त हमले के खिलाफ हैं। मुस्लिम देशों में जहां जहां अमेरिकी अड्डे हैं वहां ईरानी हमलों से भगदड़ मची हुई है। होर्मुज पूरी तरह ईरानी सैनिकों की निगरानी में हैं। मध्य-पूर्व एशिया में मौजूदा तेल के लिए दुनियां की बड़ी आबादी वाले देश सर्वाधिक चिंतित हैं।
इसी बीच होर्मुज खोलने का अमेरिका का अल्टिमेटम फेल हो गया है।उसने पांच दिन का समय बढ़ा दिया है। लेकिन ईरान झुकने तैयार नहीं है उल्टे धमकी दे रहा है यदि अमेरिका ने कहीं जलसंयत्रो को छुआ तो फिर खैर नहीं।
यानि अब तेल के बाद पानी का संकट अरब देशों के लिए संकट बन चुका है इसलिए वे सब राष्ट्र अमेरिका से दूरी बढ़ाने में लगे हैं। अमेरिका इस वक्त अलग-थलग पड़ चुका है।
भारत सीज़फायर करवाने की स्थिति में नहीं है। रोज़ाना देश में गैस और तेल की कमी बढ़ती जा रही है। झूठी ख़बरें फैलाकर मोदी की विदेश नीति की प्रशंसा हो रही है जबकि स्थिति यह है कि भारत के कई जलयान होर्मुज में फंसे हैं रुस से भी अब तक मंहगा खनिज तेल भी नहीं आया है।
जलयानों के ना आने से केवल रसोई और वाहन मुश्किल में नहीं है बल्कि ज़रुरी सामानों के ना आने और उपलब्ध माल को पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। कारखाने बंद होने की स्थिति में है। लोग शहर से गांव की ओर चल पड़े हैं। बेशक कोरोना जैसा कहर सामने है।और हमारे मोदीजी ने हमें सब्र के भरोसे छोड़ दिया है। संभव है ताली थाली भी बजे।इससे कुछ नहीं होगा। मोदीजी आपको क्षमा मांगनी चाहिए ईरान से। देश की जनता से जिसकी बिना अनुमति आपने डोनाल्ड ट्रम्प की शागिर्दी चुनी। देश को अंधकार में ढकेल दिया है।
यदि यह तनाव ख़त्म नहीं हुआ इज़राइल और ईरान के बीच सुलह नहीं हुई तो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की चपेट में आ जाएगी। जहां सब्र से काम नहीं चलेगा तब भारत के 150 करोड़ लोगों का आपसे भ्रम टूटेगा। तभी शायद भारत देश दुनिया में फिर अपना वर्चस्व कायम रख पाएगा।
(सुसंस्कृति परिहार एक्टिविस्ट, राजनीतिक टिप्पणीकार हैं।)