उफ़! अमेरिका को जिस तरह नौ करोड़ आबादी वाले देश ईरान ने सबक सिखाया है। उसी की बदौलत दुनिया के आका कहे जा रहे डोनाल्ड ट्रम्प की रणनीति की हवा निकल गई है। यही वजह कि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है क्या करें? यह उनके बदलते बयानों से समझा जा सकता है। वे कभी ईरान को 6 अप्रैल की वार्निंग देते हैं। कभी हार्मुज पर ईरान के परमाणु निर्माण स्थल और तेल को जलाने की धमकी देते हैं । अब कह रहे हैं ये मेरी लड़ाई नहीं है। जिन्हें वहां से गुजरना है वे देश लड़ें। मैं ईरान पर युद्ध दो-तीन सप्ताह में ख़त्म कर दूंगा।
इस तरह की बातों पर ईरान विश्वास नहीं कर रहा है इसलिए उसकी ओर से युद्ध जारी है अभी तक अमेरिका ईरान दोनों देश भी मोर्चे पर हैं कोई हटा नहीं है।
डोनाल्ड ट्रम्प की परेशानी यह है कि एक तो दुनिया के तमाम देशों को छोड़कर लगभग सभी देशों ने इस युद्ध में शामिल होने से इंकार कर दिया है। दूसरे उनके सबसे बड़े माई फ्रेंड को दोस्ती का नकाब फेंकना पड़ा है। देश की अवाम ईरान के साथ है। इसके अलावा इज़राइल यानि यहूदियों के धन और सहयोग से चुनाव जीतने वाले वाले ट्रम्प को इज़राइल भी उसे धोखा दे गया है। इज़राइल के कहने पर अमेरिका और भारत इस युद्ध में सहभागी था यह सच उजागर हो चुका है। हाल ही में इटली ने भारत के जिन तीन जलयानों को इज़राइल जाते हुए पकड़ा है उसमें जो सामग्री थी वह ईरान पर हमले में काम आती। इससे मोदी और नेतान्याहू जैसे बेनकाब हुए हैं।
सबसे बड़ी बात अमेरिका और भारत को शर्मसार करने वाली यह है। दोनों देश की अवाम ईरान के साथ है। अमेरिका के प्रदर्शनों ने इतिहास रच दिया है। भारत की जनता शांत नज़र आती हैं किंतु सोशल मीडिया बता रहा है कि उसके अंदर अमेरिका इज़राइल विरोधी आग सुलग चुकी है। इसी प्रेम के वशीभूत ईरान ने भारत की अवाम की सुविधा के लिए भारत को तेल गैस लदे दो जलयान भेजे हैं।
ईरान की इस भलमनसाहत के मुरीद देशवासी हुए हैं, उधर मोदीजी पर अमेरिका की नजर तिरछी हो गई। उसने ईरान के उस जहाज को विस्फोटक से उड़ा दिया है जो भारत से दवाईयां और ज़रूरत के सामान लेने भारत आने वाला था।
कुल मिलाकर ट्रम्प, मोदीजी और नेतान्याहू के चक्रव्यूह को जिस तरह ईरान ने तोड़ा है वह लाजवाब है। इसने ईरान को इराक़, अफ़ग़ानिस्तान होने से ना केवल बचाया है बल्कि दुनिया को एक कर यह साबित किया है कि अपनी सम्प्रभुता की रक्षा संकल्पबद्ध होकर कैसे की जा सकती है। साम्राज्यवादी ताकतों वाले तानाशाहों कैसे झुकाया जा सकता है?
बहरहाल अमेरिका का हाल बेहाल है, भारत अपनी यारी से परेशान हैं और इज़राइल पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। इसलिए वह अपना ग़ुबार गुबार फिलीस्तीनी कैदी नागरिकों पर उतारने बेताब है। इसे संयुक्त राष्ट्र को रोकना होगा।
(सुसंस्कृति परिहार लेखक, एक्टिविस्ट और राजनीतिक टिप्पणीकार हैं।)