राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर भाकपा (माले), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), ऐपवा तथा विभिन्न छात्र, युवा, सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों ने सोमवार को पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के माध्यम से जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान दो दिन पहले पुलिस द्वारा पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को उठाये जाने और अस्पताल में भर्ती करने का विरोध किया गया तथा आइसा केन्द्रीय अध्यक्ष नेहा, मनीष और आमीन की भूख हड़ताल के प्रति एकजुटता व्यक्त की गई।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए को भंग करने तथा पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) झारखंड राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार ने देश के करोड़ों छात्रों-युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों और सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। सरकार दमन का रास्ता छोड़कर छात्रों की मांगों को स्वीकार करे, धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाए तथा एक विश्वसनीय और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे।
ऐपवा नेता नंदिता भट्टाचार्य ने कहा कि शिक्षा के सवाल पर आवाज़ उठाने वाले छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दमन लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों के साथ संवाद करना चाहिए, न कि गिरफ्तारी और दमन का सहारा लेना चाहिए। शिक्षा को भ्रष्टाचार और निजीकरण से मुक्त कराने की लड़ाई में ऐपवा छात्र-युवा आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है।
आइसा झारखंड के राज्य उपाध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि एनटीए की विफलता और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने परीक्षा प्रणाली से छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं। सरकार को तत्काल धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेना चाहिए, एनटीए को भंग कर पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली लागू करनी चाहिए तथा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करना चाहिए।
आइसा झारखंड की राज्य सह सचिव संजना मेहता ने कहा कि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की लगातार अनदेखी और आंदोलन का दमन सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के सवाल पर उठ रही युवाओं की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। देशभर में छात्र-युवा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए जाते।
वहीं राज्य के बोकारो में भी 20 जुलाई को छात्र युवा और माले कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त कार्यालय पर किया प्रदर्शन किया।
जंतर मंतर पर अनशन कर रहे पर्यावरणविद सोनम वांगचुंग और आइसा के छात्रों के साथ तानाशाही कार्रवाई के खिलाफ आज छात्र युवा के संसद मार्च के समर्थन में भाकपा माले, इंकलाबी नौजवान सभा और छात्र युवाओं ने जिले के बोकारो एयर पोर्ट से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक आक्रोश मार्च निकाला। आक्रोश मार्च में बड़ी संख्या में छात्र युवा और माले कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
“छात्रों के सम्मान में पूरा देश मैदान में”‘ “छात्र युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करो” “पेपर लीक के जिम्मेदार धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा दो” के जोरदार नारों के साथ आक्रोश रैली उपायुक्त कार्यालय पहुँची, जहां घंटों प्रदर्शन किया गया। उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम पर ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई है।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)