भाकपा–माले बिहार सचिव कुणाल ने राज्य के विभिन्न जिलों में नीट पेपर लीक के विरोध में आंदोलनरत छात्र–छात्राओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज, फ़ायरिंग, गिरफ्तारी और बर्बर दमन की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का इस तरह दमन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि अब तक बिहार के 18 जिलों में छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलनों पर पुलिसिया कार्रवाई की गई है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है।
उन्होंने कहा कि पटना में आइसा के राज्य सचिव दीपंकर मिश्र और राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अभी तक यह नहीं बताया गया है कि उन्हें कहाँ रखा गया है। यह कानून के शासन और नागरिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। पुलिस तत्काल उनकी गिरफ्तारी की जानकारी सार्वजनिक करे, उन्हें बिना शर्त रिहा करे तथा सभी गिरफ्तार छात्र–छात्राओं को भी तुरंत रिहा किया जाए।
कहा कि भाकपा–माले की विधान परिषद सदस्य शशि यादव, विधायक संदीप सौरभ सहित आइसा के अनेक नेतृत्वकारी साथियों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर दिए गए हैं। सरकार लोकतांत्रिक आंदोलन को अपराध की तरह पेश करने की कोशिश कर रही है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने मांग की कि सभी फर्जी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं और आंदोलनकारियों के खिलाफ की गई दमनात्मक कार्रवाई की न्यायिक जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि भाकपा–माले 25 जुलाई को आहूत बिहार बंद का नैतिक समर्थन करती है। पार्टी राज्यभर के छात्रों, नौजवानों, अभिभावकों और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले नागरिकों से इस बंद का समर्थन करने की अपील करती है। साथ ही छात्र समुदाय से भी आग्रह किया गया कि वे अपना आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और विधिसम्मत तरीके से आगे बढ़ाएँ, ताकि उनकी न्यायपूर्ण आवाज़ और अधिक मजबूती से पूरे समाज तक पहुँचे।
अंत में कहा कि सरकार दमन का रास्ता छोड़कर छात्रों की बात सुने, सभी गिरफ्तार आंदोलनकारियों को तत्काल रिहा करे, फर्जी मुकदमे वापस ले, पुलिस दमन की निष्पक्ष जांच कराए तथा पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे। सरकार धर्मेंद्र प्रधान को अविलंब हटाए। यही लोकतंत्र और छात्रों के भविष्य के हित में होगा।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)