यह समय मीडिया के लिए सबसे संकट और चुनौतीपूर्ण है : राजेंद्र शर्मा

भोपाल।  वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शर्मा ने शुक्रवार, 24 जुलाई, को मीडिया की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की और अफ़सोस जताया कि जिस देश में मीडिया ने स्वतन्त्रता आन्दोलन में इतनी प्रमुख भूमिका निबाही थी कि हर महत्वपूर्ण नेता स्वयं अखबार निकालता था,पत्रकार और सम्पादक होता था आज उसी मीडिया को जंतर-मंतर पर जनता के रोष और बहिष्कार का शिकार होना पड़ रहा है।

वह दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय भोपाल में लोकजतन सम्मान 2026 से सम्मानित किए जाने के अवसर पर बोल रहे थे। वे 1979 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद ही परिवर्तनकामी  प्रतिबद्ध पत्रकारिता के प्रति समर्पित कर हैं। 

अनेक किताबों के लेखक, कई अखबारों के स्तंभकार, कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों के सम्पादक रह चुके शर्मा, जिस लोकलहर से उन्होंने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की थी, उस के सम्पादक हैं। व्यंगकार एवं कवि वीरेन्द्र जैन की अध्यक्षता में उन्हें प्रदेश के वरिष्ठतम संपादकों में से एक डॉ राम विद्रोही ने सम्मान पत्र भेंट किया । आज के ही समारोह में कोरोना लॉकडाउन के दौरान 2020 के लोकजतन सम्मान से अभिनंदित कमल शुक्ला (बस्तर रायपुर) को भी मानपत्र भेंट किया गया।

उन्होंने कहा कि आज मीडिया का यह हाल है कि भारत की जनता का युवतम हिस्सा उसका बायकाट करते हुए कह रहा है कि तुम हमारी अभिव्यक्ति के लायक होने का अधिकार खो चुके हो। उन्होंने कहा कि यह आज ही नहीं हो रहा – 6 वर्ष पहले किसानों के एतिहासिक आन्दोलन से ही मीडिया भर्त्सना और धिक्कार का शिकार बना हुआ है । 

मीडिया के जनता का विरोधी  समझे जाने की इस स्थिति तक पहुँच जाने के पीछे के कारण स्पष्ट करते हुए राजेंद्र शर्मा ने कहा कि मीडिया के बड़ी  पूँजी के सम्पूर्ण कब्जे में आने और इनके द्वारा पिछड़ी और साम्प्रदायिक ताकतों के साथ गठजोड़ कर लिए जाने के बाद से हालात बिगड़े हैं।

उन्होंने कहा कि 2014 में केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद से तो जैसे मीडिया को जनता के विरुद्ध हथियार के रूप में ही तब्दील कर दिया गया है। लोग मुख्य धारा के मीडिया को अपने जीवन से बाहर कर रहे हैं। मीडिया से जुड़े एक हर व्यक्ति के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। हालांकि इस संकट और चुनौतियों के दौर में भी अनेक अखबार और खासतौर से यूट्यूबर और युवा पत्रकार अच्छी भूमिका निबाह रहे हैं और इसके चलते शासन और पुलिस के दमन का शिकार भी बन रहे हैं। 

लोकजतन सम्पादक बादल सरोज ने बताया कि यह सम्मान हर वर्ष लोकजतन के संस्थापक-सम्पादक शैलेन्द्र शैली (24 जुलाई 1957 – 07 अगस्त 2001) के जन्मदिन  के अवसर पर ऐसे पत्रकारों को दिया जाता है, जो भारतीय पत्रकारिता के आज के दु:समय में भी सच बोलने और लिखने का दुस्साहस कर रहे हैं।

इस सम्मान से अभी तक डॉ. राम विद्रोही (ग्वालियर), कमल शुक्ला (बस्तर-रायपुर), लज्जा शंकर हरदेनिया (भोपाल), अनुराग द्वारी (भोपाल), राकेश अचल (ग्वालियर), पलाश सुरजन (भोपाल),  शहीद पत्रकार मुकेश चंद्राकर (बस्तर) जैसे प्रमुख पत्रकारों को अभिनंदित किया जा चुका है।

समारोह का संचालन वरिष्ठ कहानीकार, संस्कृतिकर्मी मनोज कुलकर्णीं ने किया। आभार प्रदर्शन संध्या शैली ने किया। इस अवसर पर अनेक पत्रकार, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रबुद्ध नागरिक एवं जन आंदोलनों से जुड़े नागरिक उपस्थित थे। 

शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान 2026 में बोलते हुए प्रख्यात फिल्म समीक्षक एवं कला संस्कृति के अध्येता जवरीमल्ल पारख ने मौजूदा दौर में फिल्मों – विशेषकर हिंदी फिल्मों – के जबरदस्त दुरुपयोग की स्थिति सामने रखी। उन्होंने कहा है कि फिल्मों की यह क्षमता है कि वे झूठ को सच, अयथार्थ को यथार्थ बनाकर दिखा सकती हैं : सत्ता वर्गों ने इसका भयानक दुरुपयोग किया है।

उन्होंने कहा कि मध्य युग के इतिहास की झूठी व्याख्या करने वाली फिल्मों ने भारत के समुदाय के एक बड़े हिस्से मुसलमानों को विदेशी शत्रु के रूप में दिखाया जा रहा है। उस वास्तविक भाईचारे को ध्वस्त किया जा रहा है जो हमेशा अस्तित्वमान रहा है।

उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन को विकृत किया जा रहा है। असली क्रांतिकारी ओझल किए जा रहे हैं – माफी मांगने वाले वीर बताये जा रहे हैं। व्यवस्थित और योजना के साथ निवेश करके प्रोपेगेंडा फ़िल्मों की बाढ़ सी आना इसी का उदाहरण है। फिल्में भरमाने का जरिया बन गई हैं ।

पारख ने रेखांकित किया कि अच्छी बात है कि इतने दबाव के बावजूद कई फिल्में ऐसी भी बनी हैं जिन्होंने वह भूमिका निभाई है जो निबाहनी चाहिए। इस सिलसिले में उन्होंने हाल की फिल्मों के उदाहरण भी दिए ।

आज से शुरू हुई शैली स्मृति व्याख्यान श्रृंखला 7 अगस्त तक जारी रहेगी और प्रदेश भर में तीन दर्जन से अधिक स्थानों पर सेमिनार संवाद किए जायेंगे।

समारोह की शुरुआत भोपाल के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, सीटू के प्रदेश अध्यक्ष पूषण भट्टाचार्य के परिचयात्मक संबोधन से हुई। सुश्री वन्दना शर्मा भी मंच पर उपस्थित थीं।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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