धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा छात्र-युवा आंदोलन की एक बड़ी जीत : माले

भाकपा (माले) के झारखंड राज्य कमिटी के राज्य सचिव मनोज भक्त ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा छात्र-युवा आंदोलन की एक बड़ी जीत है।

भक्त ने कहा कि इसका पूरा श्रेय उन लाखों छात्र-नौजवानों को जाता है जिन्होंने देशभर में सड़कों पर उतरकर संघर्ष किया। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा लेकिन इस्तीफ़े के बावजूद न धर्मेंद्र प्रधान ने और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की, जो इस बात को दर्शाता है कि आन्दोलन के दौरान छात्रों, युवाओं और अनशन पर बैठे साथियों, जिनमें सोनम वांगचुक भी शामिल थे, की आवाज़ को अनसुना किया गया है।

उन्होंने संसद चलो मार्च के दौरान बच्चों और महिलाओं तक पर बर्बर लाठीचार्ज किए जाने, पैलेट गन के इस्तेमाल, और आँसू गैस के गोले दागे जाने के ज़िक्र करते हुए कहा कि इतना सब होने के बाद भी सरकार ने कोई पश्चाताप नहीं जताया, जो मोदी सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

राज्य सचिव ने कहा कि बिहार में आंदोलनरत छात्र-युवाओं पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं और छात्र नेताओं को जेल भेजा गया है। भाकपा (माले) इन सभी झूठे मुकदमों को तत्काल वापस लेने तथा गिरफ्तार छात्र नेताओं की अविलंब रिहाई की मांग करती है।

उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों की प्रगतिशील परंपरा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को पुनर्स्थापित करना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। छात्र-युवा आंदोलन ने पूरे देश को नई प्रेरणा दी है और लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष की नई ऊर्जा पैदा की है। हमें देश के लोकतंत्र को पुनः मजबूत करना है और सिद्धू-कान्हू, बिरसा मुंडा, सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख, भगत सिंह और डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपनों के समानता, न्याय, भाईचारे और लोकतंत्र पर आधारित आधुनिक भारत का निर्माण करना है।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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