कांवड़िए और काक्रोचों का ज़ोर है सावन में 

देश की सरकार इस वक्त सनातन की रक्षा में फ्रिकमंद है। मनभावन सावन में कांवड़ियों की भीड़ से आम नागरिक को डर लगता है क्योंकि ये लोग अपने को भगवान शंकर का अनुयायी मानते हैं और जगह-जगह तांडव नर्तन कर शिव अनुराग का ऐसा बेहूदा प्रदर्शन करते हैं कि वास्तविक सनातनियों को गहरी चोट लग रही है जिसका विरोध तब से ही हो रहा है जब से कथित सनातन भाजपा सरकार को इसको सहयोग करना शुरू किया है।

सड़क पर नमाज़ पढ़ने वालों का सरेआम अपमान करने वाली यह सरकार इनके ख़िलाफ़ मूक बनी रहती है क्योंकि सनातनियों के वोट का मामला है और इसके साथ ही मुसलमानों और विधर्मियों से निपटने का ऐसा पुनीत अवसर साल में एक बार आता है। एक बार गालियों से व्यथित साहब जी को इनको सुनना चाहिए जो शिव-पार्वती के लिए ऐसे गंदे गीत गाते हैं जो अक्षम्य अपराध है।

आम लोगों को कितनी परेशानी भुगतनी होती है। मुसलमान तो इनके रास्ते में आ नहीं सकते। ये आमतौर पर नशेबाज और अशिक्षित होते हैं। अब तो भारतीय सनातनी नारी भी इस जलसे में शामिल हो रही है उसे क्या इनसे डर नहीं लगता। धर्म का मामला है सब चलता है।

जबकि दूसरी ओर काक्रोच जनता पार्टी के जनांदोलन में पढ़े-लिखे जेन जेड जो लोकतंत्र को बचाने की जद्दोजहद करने में लगे हैं। सरकार को फूटी आंख नहीं भा रहे हैं। वे बिना हथियार सत्याग्रह के रास्ते पर जनगीत के ज़रिए जनांदोलन को जीवंत बनाए हुए हैं। पिछले दिनों गृहमंत्री के इशारे पर जिस तरह बेकसूर युवाओं पर पैलैट गन और कील लगी लाठियों से बर्बरता पूर्वक हमला किया गया वह प्रजातांत्रिक देश में आवाज़ बुलंद करने वालों पर पूरी तरह अवैधानिक है।

इससे युवा आक्रोशित हुए हैं लेकिन उन्होंने गांधी की राह पर चलके आंदोलन को और गति दी है। जिससे सरकार की नींद उड़ी हुई है।शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होने के बाद अब युवाओं के साथ बर्बर लाठी गोली का आदेश देनेवाले गृहमंत्री का इस्तीफा मांगा जा रहा है।देश को बर्बादी की ओर ले जाने प्रधानमंत्री भी अब निशाने पर हैं। एक साधारण सी मांग के बाद जेन जेड ने जो तस्वीर देश की देखी है उससे युवाओं के दिलों में भगत सिंह का खून दौड़ने लगा है।

वे सरकार से मुक्ति को दूसरी आज़ादी मानकर एक नागरिकों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें बड़ी तादाद में छात्राओं की उपस्थिति और उनका जोश पहली बार देखने मिला है। जहां तक गाली-गलौज की बात है वह संघ द्वारा प्रायोजित खेला था इसीलिए उनको माफी की बात सामने आई है। बाबा नागार्जुन आज बहुत याद आ रहे हैं वे लिखते हैं –

पुलिस मोहकमे के वे जालिम,सुन ले मेरी बात 

जनता ने हिटलर, मुसोलिनी तक को मारी लात

आज सावन में दो तरह की आग प्रज्वलित है एक प्रायोजित सनातनी आग है तो दूसरी ओर संविधान विरोधी तत्वों के विरुद्ध आग है। सरकार बदलने की तमन्ना लिए है।जबकि प्रायोजित कथित कांवड़ियों की अमर्यादित भीड़ सरकार की ताकत कथित सनातन को बचाने के लिए है।

देशवासी इस बीच इन दोनों की फितरत से बखूबी परिचित हो चुके हैं इसलिए उनकी संख्या बढ़ रही है जो संविधान में यकीन रखते हैं। उन्हें यकीन है सारी दिक्कतों के बीच एक दिन वे लोकतांत्रिक देश में बढ़ते फासिस्ट खतरों से निज़ात दिला पाएंगे।

समूचे विपक्ष ने और प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने अब तक बिना डरे जिस तरह फासिस्ट संगठन और उसकी टुकड़े-टुकड़े गैंग के कारनामे सामने लाए हैं उम्मीद है युवा शक्ति इस अंधेरे को दूर करने में प्रमुख भूमिका निभायेगी। देश भर के काक्रोच कथित प्रायोजित कांवड़ियों पर निश्चित बहुत भारी पड़ेंगे।

(तस्वीर : प्रतीकात्मक, वीडियो ग्रैब)

(सुसंस्कृति परिहार एक्टिविस्ट और टिप्पणीकार हैं।)

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