पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने लखनऊ जेल में बंद फिल्ममेकर विशाल सिंह के उचित चिकित्सा व्यवस्था के संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा है।
पीयूसीएल की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष टीडी भास्कर और महासचिव चित्तजीत मित्रा ने पत्र लिखकर आयोग को न्यूज़ पोर्टल “मकतूब मीडिया” की खबर के हवाले से बताया है कि लखनऊ जेल में बंद आरोपी कैदी विशाल सिंह, की हालत बेहद नाज़ुक है और जेल अस्पताल के इलाज से उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
पीयूसीएल ने आयोग से इस पर कार्यवाही की उम्मीद जताई है और कहा है कि किसी व्यक्ति पर यदि आरोप लगा है तो उसके बारे में अदालतें निर्णय देंगी लेकिन जेल में रहते हुए हर व्यक्ति का जीवन सुरक्षित होना चाहिए। भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 हर किसी को, कैद में बंद लोगों को भी जीवन का अधिकार सुनिश्चित करता है। जेल में बंद कैदी का समुचित इलाज इस अधिकार को लागू करने के लिए बेहद ज़रूरी है।
खबर के मुताबिक विशाल सिंह जो मथुरा के रहने वाले हैं, को दिल्ली स्थित उनके आवास से 22 जून 2025 को केस नंबर आरसी -01/2023/NIA/LKW में गिरफ्तार किया गया था। जेल में रहने के दौरान उनकी आंखों की रोशनी इतनी तेज़ी से कम होने लगी कि उनकी पार्टनर 22 जुलाई 2026 को जब उनसे मुलाकात करने पहुंची, तो वे उन्हें 1 फुट दूर से भी नहीं पहचान सके। उनका ब्लड प्रेशर लगातार 200 से ऊपर रह रहा है और हाल ही में उनके चेहरे के एक हिस्सा सुन्न हो गया, चेहरे और पैरों में बहुत अधिक सूजन आ गई।
वे अपने आप चल नहीं पा रहे, बाथरूम तक भी वे खुद चलकर नहीं जा पा रहे हैं, उनके सिर में भयंकर दर्द रह रहा है और उन्हें उल्टियां हो रही हैं। इस स्थिति में उनसे पानी भी नहीं पिया जा रहा है, खाना तो बहुत दूर की बात है। जेल के अस्पताल के इलाज से उन्हें कोई फायदा नहीं हो रहा, जहां बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के उन्हें केवल वेलप्रो 650 दी जा रही है।उनसे मिलने गए परिजनों के मुताबिक जेल अस्पताल में केवल उनका ब्लड प्रेशर और शुगर नापा जा रहा है।
पीयूसीएल के अनुसार विशाल सिंह के वकील ने लखनऊ की एनआईए कोर्ट में उनकी इस शारीरिक अवस्था का हवाला देकर बाहर अच्छे इलाज की मांग की, तो कोर्ट ने उन्हें जेल अस्पताल में ही उनका इलाज करने का आदेश जारी कर दिया। लेकिन प्राप्त खबर के मुताबिक उन्हें वहां के इलाज से कोई फायदा नहीं है और वे ज़्यादा देर तक खड़े भी नहीं रह पा रहे हैं।
विशाल सिंह 34 साल के युवा हैं और डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर हैं।
पत्र के अनुसार इसके पहले प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की जेल अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही और अदालत द्वारा समय पर बाहर इलाज का आदेश जारी न करने के कारण मौत हो चुकी है। सही समय पर इलाज के लिए उचित अस्पताल में न भेजे जाने के कारण 2023 में लखनऊ जेल में बंद कैदी अनिता का खतरनाक गर्भपात हो चुका है, जिसमें किसी तरह खुद उसकी जान बच सकी।
पीयूसीएल ने ऐसी कई घटनाओं को याद कर विशाल सिंह के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जतायी है और मानवाधिकार आयोग से आग्रह किया है की विशाल सिंह के इलाज के लिए विशेषज्ञ अस्पताल और डॉक्टर के पास भेजने के लिए आवश्यक कदम उठाने के आदेश जारी किए जाएं ताकि जेल में बंद हवालाती नौजवान को बचाया जा सके, साथ ही भारत के संविधान के आर्टिकल 21 को भी अमल में लाया जा सके।
(तस्वीर मकतूब मीडिया से साभार)
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)