रांची। वाम दलों, झारखंड जनाधिकार महासभा और कई अन्य जनवादी संगठनों ने सोमवार, 17 अगस्त, को खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को झारखंड पर घातक आर्थिक हमला बताते हुए अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रतिरोध मार्च किया।
विधेयक को लोकसभा ने 12 अगस्त 2026 को और राज्यसभा ने 13 अगस्त 2026 को मंजूरी दी है।
वक्ताओं ने कहा कि यह विधेयक खनिज अधिकारों एवं खनिज-युक्त भूमि पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले करों, उपकरों एवं अन्य शुल्कों को केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन सीमित करके एक समान एवं पूर्वानुमेय खनिज कराधान ढाँचा स्थापित करने का प्रयास करता है।
धारा 9डी राज्यों को खनिज अधिकारों एवं खनिज-युक्त भूमि पर कर अथवा शुल्क लगाने से प्रतिबंधित करती है। इसमें खनिज की मात्रा, मूल्य अथवा रॉयल्टी के आधार पर लगाए जाने वाले कर भी शामिल हैं, जब तक कि वे केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अंतर्गत अनुमत न हों।
वक्ताओं के अनुसार मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया मामले में सर्वोच्च न्यायालय के 9 न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने वर्ष 2024 के खनिज अधिकार संबंधी निर्णय दिया कि राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति है। साथ ही, न्यायालय ने संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने के राज्यों के अधिकार को भी मान्यता दी।
मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि यह विधेयक झारखंड राज्य के संसाधनों की लूट ही नहीं झारखंड की जनता, यहां के आदिवासियों द्वारा संरक्षित संसाधनों, यहां की जल, जंगल, जमीन, हवा पर कब्जा कर लिए जाने जैसा है, झारखंड के स्वशासन को भी खत्म करने की साजिश है, यह विधेयक पूरे झारखंडीयत पर हमला हैं, झारखंड की हमेशा से केंद्र की भाजपा सरकार ने और भाजपा की राज्य सरकारों ने सिर्फ लूटने का काम किया हैं।
मोदी सरकार का सरासर विद्वेष दिखाई पड़ता है। मोदी सरकार इस विधेयक को तुरंत वापस ले अन्यथा झारखंड की जनता को मजबूरन राज्य से खनिज ढुलाई ठप्प करेगी।
मार्च में कहा गया कि झारखंड के तमाम भाजपा मंत्री, सांसद और विधायक झारखंड की जनता को भाजपा की गद्दारी का जवाब दें। झारखंड की जनता के साथ हुए इस धोखे की जवाबदेही ले। झारखंड की जनता का प्रतिनिधित्व करते हुए केंद्र की सरकार पर विधेयक वापसी का दवाब बनाए या भाजपा के सारे सांसद और विधेयक इस्तीफा दें। इस विधेयक के खिलाफ भाकपा, माकपा, भाकपा-माले, एसयूसीआईसी, झारखंड जनाधिकार सभा एवं अन्य जनसंगठनों के सदस्यों ने आगे और बड़े आंदोलन करने की चेतावनी के साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)