छात्रों पर हुए दमन का हिसाब लिया जाएगा : नेहा

आइसा राष्ट्रीय महासचिव नेहा ने कहा कि जंतर मंतर छात्र आंदोलन के दौरान बिहार में छात्रों पर हुए दमन का हिसाब लिया जाएगा।

नेहा यहाँ पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आइसा और आरवाईए के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘जेन-ज़ी राइजिंग’ कार्यक्रम में बोल रही थीं। उन्होंने भाजपा एवं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान सम्राट सरकार के दमन का चेहरा सामने आया।

नेहा ने कहा कि बिहार में आंदोलनकारी छात्रों और उनके परिवारों को भी दमन का सामना करना पड़ा। आदित्य जैसे छात्रों के पिता के साथ मारपीट की गई, आइसा नेत्री सबा आफरीन के साथ ज्यादती की गई और उन्हें उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर प्रताड़ित किए जाने के आरोप सामने आए। छात्रों को अपराधियों की तरह पेश करते हुए उनके चेहरे अखबारों में प्रचारित किए गए।

उन्होंने कहा कि बिहार की जनता और खासकर छात्र-युवा इन तमाम सवालों का जवाब जरूर लेंगे। छात्रों पर हुए दमन का हिसाब लिया जाएगा, बिहार में छात्राओं और महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा और बलात्कार की घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। एसआईआर की प्रक्रिया में लोगों के मताधिकार और नागरिकता से जुड़े सवालों पर पैदा हुई चिंताओं का भी उन्हें जवाब देना होगा।

उन्होंने कहा कि बिहार के छात्रों को बीपीएससी 70वीं परीक्षा में धांधली और दरोगा भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं के सवाल पर भी जवाब चाहिए। छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली हर अनियमितता का हिसाब लिया जाएगा।

उन्होंने बिहार के छात्रों और युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों, शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के सवालों पर एकजुट हों। अब समय आ गया है कि बिहार का छात्र-युवा आंदोलन दमन, अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत जनआंदोलन का रूप ले और सरकार से हर सवाल का जवाब मांगे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि जेन-ज़ी का मतलब केवल एक पीढ़ी नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष और अपने हक की लड़ाई है। आज युवाओं के सामने शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और सम्मान के सवाल सबसे बड़े सवाल हैं।

उन्होंने कहा कि ‘स्कूल ठीक करो’ आंदोलन को बिहार में एक व्यापक जनआंदोलन बनाने की जरूरत है। वन नेशन वन इलेक्शन की बात करने वाले लोग वन नेशन वन एजुकेशन सिस्टम की बात क्यों नहीं करते हैं। कॉमन स्कूल सिस्टम की लड़ाई छात्र युवा लड़ेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि कहा कि पिछले 20 वर्षों में बिहार की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को सबसे ज्यादा बर्बाद किया गया है। स्कूलों की आधारभूत संरचना, शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में है। सरकार ने विद्यालयों के नाम बदलने और उन्हें उत्क्रमित करने की घोषणा तो की, लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उत्क्रमित विद्यालय आज भी उपेक्षा और बदहाली का शिकार हैं, उत्क्रमित नहीं  उत्पीड़ित विद्यालय बनाए गए हैं बिहार में।वहीं विश्वविद्यालय भी गंभीर संकट से गुजर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल छात्रों और शिक्षकों का सवाल नहीं, बल्कि पूरे बिहार के भविष्य का सवाल बनाना होगा। बिहार के हर व्यक्ति से अपील है कि शिक्षा के सवाल को जनआंदोलन बनाएं। बेहतर स्कूल, पर्याप्त शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सभी के लिए समान शिक्षा व्यवस्था के लिए व्यापक संघर्ष खड़ा करना होगा।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में देश में सोशल मीडिया के जरिए लड़कियों और युवाओं को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि  प्रधानमंत्री मोदी इंस्टग्राम पर आकर आंदोलन और उसकी भाषा का जिक्र करते हुए कहते हैं कि यह कल्चरल शॉक था उनके लिए। उनका यह बयान  एक तरह का उकसावा था, जिसने गुंडागर्दी और हिंसा की ताकतों को प्रोत्साहित किया। इसका असर सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक देखने को मिला। रुचिका सिंह जैसी युवतियों की पीड़ा सामने आई, जिन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  के इस बयान ने उनका  जीवन नर्क बना दिया ।

दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि 15 अगस्त को युवाओं और आंदोलनकारियों को ‘दिमागी नक्सल’ कहकर निशाना बनाना भी इसी उकसावे की राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पुराने जुमलों की राजनीति अब खत्म हो रही है और युवाओं के सवालों का जवाब दमन और बदनाम करने की कोशिश से नहीं दिया जा सकता। बंगाल में स्कूल आंदोलन  में शामिल युवक  के पिता के साथ हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के उकसावे वाले बयानों का ही हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी 15 अगस्त को लाल किले से  से वॉलेंटियर फोर्स बनाने की बात कह रहे थे, उनका वॉलिंटियर फोर्स वही गुंडे हैं जो आंदोलनों में व्यवधान उत्पन्न करते हैं और लोगों को पीटते हैं।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केस खत्म करने की बात कही है, जो स्वागतयोग्य है। जंतर मंतर आंदोलन के मुकदमे वापस हो सकते हैं तो किसान आंदोलन और शाहीन बाग आंदोलन के मुकदमे भी वापस हों।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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