पंजाब भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बहुप्रतीक्षित लक्ष्य, जहाँ भाजपा अपनी सत्ता स्थापित करना चाहती है। इस प्रदेश में भाजपा की स्वीकार्यता इतने बरसों में सभी तरह के प्रयासों के बाद भी कभी बन ही नहीं पाई। भाजपा की नीतियों का दृढ़ विरोध पंजाब ने 3 कृषि कानूनों को वापस करवा कर दिखा दिया था। 2024 के लोकसभा चुनावों में पंजाब ने अपनी पहचान और बौद्धिकता का परिचय दिया और कांग्रेस राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
भाजपा का नया प्रयोग
भाजपा पूरे देश में अपनी सत्ता के उरूज पर अपने बूते एक और प्रयोग पंजाब में करने के अवसर को गढ़ने में लगी है। भाजपा ने अपनी नई कार्यपद्धति से हालाँकि पंजाब से आम आदमी पार्टी के 6 राज्य सभा सांसद अपने पक्ष में कर लिए, लेकिन वो सभी सीधे मतदाताओं द्वारा चुने नहीं गए थे। पंजाब के प्रति संवेदना और सरोकार की नई इबारत भाजपा अब ‘नशा मुक्त पंजाब’ का सपना दिखा कर जताने के यत्न में लगी है।
सामाजिक अभियान या राजनीतिक पुनर्स्थापना की रणनीति
पंजाब में फरवरी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने 18 सितंबर 2026 से 13 दिवसीय ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू की है। माना जा रहा है कि भाजपा पंजाब में बंगाल की ‘परिवर्तन यात्रा’ की तरह ही यह प्रयोग अपने राजनीतिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर रही है। पार्टी इसे ड्रग्स के खिलाफ जन-जागरण अभियान बता रही है, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव से पहले राज्यव्यापी संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान है। भाजपा ने पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया हुआ है और पुराने गठबंधन साथी अकाली दल के साथ अभी तक कोई गठबंधन के संकेत दिए नहीं।
इस यात्रा की अवधि: 18–30 सितंबर 2026 है और इसमें कुल दूरी: लगभग 4,000 किमी होगी, जो कि सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी। चार समानांतर यात्राएँ पठानकोट, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का और तलवंडी साबो से शुरू होंगी। समापन: 30 सितंबर, जालंधर में होगा, जहाँ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन की योजना बताई गई है। यात्रा की शुरुआत पठानकोट (18 सितंबर) से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे। फतेहगढ़ साहिब (19 सितंबर) से दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, फाजिल्का (20 सितंबर) को केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और तलवंडी साबो (21 सितंबर) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान रवाना करेंगे।
नशा: पंजाब का वास्तविक संकट
स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान चंडीगढ़ (PGI) द्वारा साल 2022 में जारी की गई रिपोर्ट (“Roadmap for Prevention and Control of Substance Abuse in Punjab”) के अनुसार, पंजाब की कुल आबादी का लगभग 15.4% हिस्सा (30 लाख से अधिक लोग) किसी न किसी तरह के नशे या नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा है। अध्ययन के मुताबिक, राज्य में हर 7वां व्यक्ति नशे की चपेट में पाया गया। 2015 के AIIMS दिल्ली के अध्ययन में पंजाब में लगभग 2.3 लाख ओपिऑइड-निर्भर लोगों का अनुमान लगाया गया था। हर साल प्रदेश में ओवरडोज से लगभग 100 के करीब मौतें दर्ज की गईं। 2024 ओवरडोज मौतें 106 (NCRB) दर्ज की गयीं।
नशे पर बनी और गिरी सरकारें
पंजाब में “चिट्टा” (हेरोइन) और सिंथेटिक ड्रग्स का मुद्दा लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक चिंता का विषय रहा है। नशे के मुद्दे पर पहले भी तीन बार सरकारें बन चुकी हैं और कोई स्थायी समाधान न करने के चलते सत्ता गंवा चुकी हैं। 2012 में प्रकाश सिंह बादल अकाली दल, 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस सरकार और 2022 में अरविन्द केजरीवाल की 4 महीने की गारंटी वाली सरकार इस नशे को पंजाब से खत्म करने के नाम पर बनी थी।
भाजपा की रणनीति: AAP को सीधे चुनौती
भाजपा ने यात्रा से पहले “मावां मंगदियां जवाब” कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें ड्रग्स से प्रभावित परिवारों ने सार्वजनिक रूप से अपने अनुभव साझा किए। इस यात्रा से भाजपा ने पंजाब में आम आदमी पार्टी को सीधा निशाने पर लेकर पंजाब के चुनावी मुकाबले में खुद को पंजाब में मुख्य विकल्प के तौर पर स्थापित करने की रणनीति अपनाई है। पंजाब में नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गई है; यह स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, सीमा सुरक्षा और राजनीति—चारों का मिला-जुला संकट बन चुकी है।
तीन क्षेत्रों में एक साथ राजनीतिक संदेश
यात्रा का मार्ग मालवा, दोआबा और माझा—तीनों क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे यह साफ होता है कि पार्टी व्यापक सामाजिक संपर्क बनाना चाहती है। भाजपा पहली बार लगभग हर विधानसभा क्षेत्र में अपनी जमीनी उपस्थिति दिखाने के साथ-साथ नए स्थानीय नेताओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा 2007–2017 के दौरान शिरोमणि अकाली दल के साथ सत्ता में थी और उसी दौर में नशे की समस्या गंभीर हुई। इस तरह दोनों दल अलग-अलग समय की जिम्मेदारी के आरोप-प्रत्यारोप एक-दूसरे पर लगा कर नशे का मुद्दा उठा रहे हैं। पिछले एक दशक के सरकारी रिकॉर्ड, संसद में प्रस्तुत आंकड़े, NCRB, AIIMS, PGIMER और हालिया शोध बताते हैं कि पंजाब में नशे की समस्या व्यापक है।
35–40 सीटों पर क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है यह मुद्दा?
आम आदमी पार्टी की सरकार का ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ भी कोई सफलता प्रदेश में स्थापित कर नहीं पाया। नशा तस्कर और गैंगस्टर का नेक्सस जस का तस बना हुआ है। पंजाब के रिकॉर्ड दिखाते हैं कि बड़ी संख्या में NDPS मामले, हजारों गिरफ्तारियाँ, भारी मात्रा में हेरोइन की बरामदगी, उपचार केंद्रों में लाखों पंजीकरण और ओवरडोज मौतों के आंकड़े संकट की गंभीरता को स्पष्ट करते हैं। साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही; सार्वजनिक स्वास्थ्य, पुनर्वास, रोजगार और सीमा सुरक्षा—सभी क्षेत्रों में राज्य एवं केंद्रीय सरकार की संयुक्त रणनीति की आवश्यकता बनी हुई है।
मालवा, दोआबा और माझा के अलग-अलग राजनीतिक समीकरण हैं। 35–40 सीटों पर नशा मुद्दा बड़ा और निर्णायक बन सकता है। भाजपा इस मुद्दे को पूरे राज्य के राजनीतिक विमर्श और निर्णय में मुख्य बनाना चाहती है। माझा और मालवा के कई विधानसभा क्षेत्र नशे की गंभीर जकड़ में हैं। मालवा इसलिए सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ सबसे अधिक सीटें हैं और ड्रग्स का मुद्दा कई जिलों में लंबे समय से सार्वजनिक चिंता का विषय रहा है। बठिंडा जिला में बठिंडा रूरल, तलवंडी साबो, मौड़, मानसा जिला में बुढलाडा, फरीदकोट जिला में फरीदकोट और कोटकपूरा, मुक्सर जिला में मलौट और गिदड़बाहा, फाजिल्का में जलालाबाद, अबोहर, बरनाला, संगरूर जिला और लुधियाना की सीटें शामिल हैं।
भाजपा का संदेश पूरे पंजाब में है मौजूद
भाजपा की नशा मुक्त यात्रा केवल सामाजिक अभियान नहीं, बल्कि राज्यव्यापी राजनीतिक स्थापना का रणनीतिक प्रयास भी मानी जा रही है। पंजाब में ड्रग्स की सार्वजनिक चर्चा पहले से मौजूद है। शहरी और ग्रामीण दोनों वर्गों में कानून-व्यवस्था पर बहस भी निरंतर बनी हुई है। हाल ही में संगरूर जिले की धुरी विधानसभा के अंतर्गत मुख्यमंत्री भगवंत मान के लोक मिलनी कार्यक्रम में सिख युवक द्वारा आम आदमी पार्टी की नशा उन्मूलन नीति के विरुद्ध स्वरूप आवाज उठाने पर पुलिस की ज्यादती का मामला सुर्खियों में रहा। पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा की विधानसभा के तूर माजरा गांव में 47 वर्षीय दलित मजदूर द्वारा सार्वजनिक सभा में नशे का मुद्दा उठाने पर प्रताड़ित किया गया और गुलजार सिंह ने आत्महत्या कर ली, जो एक बड़ा मुद्दा पंजाब में आम आदमी पार्टी की हकीकत को बयां करता है।
क्या मान लिया जाए कि भाजपा यह दिखाना चाहती है कि पार्टी अब पूरे पंजाब में मौजूद है। यह कहना कि यह रणनीति चुनावी सफलता में कितनी बदलेगी, अभी समयपूर्व होगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ केवल सामाजिक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में अपनी संगठनात्मक और राजनीतिक उपस्थिति को अधिक व्यापक रूप से स्थापित करने का एक संगठित प्रयास भी दिखाई देती है।
(जगदीप सिंह सिंधु वरिष्ठ पत्रकार हैं।)