आम लोगों का अगर कोई दुख-दर्द है या कोई समस्या है तो उसे सामने आने से रोकना गलत है। अगर लोगों का दुख-दर्द सामने नहीं आयेगा तो शासन-प्रशासन को सच्चाई की जानकारी कैसे मिलेगी और फिर उस पर जनता के मसलों को हल करने का दबाव कैसे बनेगा!
कल शाम यूपी के नोएडा की पुलिस ने मशहूर युवा पत्रकार श्याम मीरा सिंह और उनके एक सहयोगी को हिरासत में ले लिया। देर शाम संभवत: निजी मुचलके पर छोडा गया. पर मामला दर्ज हो गया। प्रमुख अखबारों में छपी रिपोर्ट में पुलिस के हवाले बताया गया है पत्रकार-यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह और उनके सहयोगी “सड़क किनारे वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे, जिससे भीड़ इकट्ठा हो गई। उन्हें वहां से हटने को कहा गया तो वह पुलिस के साथ दुर्व्यवहार करने लगे!” पुलिस के हवाले अखबारी रिपोर्ट में बताया गया है कि पत्रकारों के विरुध्द बीएनएसएस के सेक्शन 170 के तहत मामला दर्ज किया गया।
दिलचस्प बात है कि अखबारी खबर में घटनास्थल पर मौजूद लोगों के हवाले बताया गया है कि इन रिपोर्टरों की रिकॉर्डिंग से वहां ट्रैफिक की समस्या नहीं पैदा हुई थी। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में तो एक पुलिस कर्मी के हवाले (नाम जाहिर न करने के अनुरोध के साथ) भी यह बात कही गयी है।
उपरोक्त तथ्यों से एक बात आईने की तरह साफ है कि घटनास्थल पर रिकॉर्डिंग के चलते किसी तरह की भीड़ या ट्रैफिक समस्या नहीं पैदा हुई कि पुलिस को वहां हस्तक्षेप करना जरूरी हो गया था! पत्रकार वहां “बिजली, सिलेंडर या गैस आदि की किल्लत है या नहीं” जैसे सवाल पर वहां के कुछेक लोगों की राय ले रहे थे। अब ये सब तो अपराध की श्रेणी में नहीं आता! पर अपने यहां की पुलिस चाहे तो किसी आम संवाद को भी आपराधिक कृत्य बना ही सकती है! पर ये 21वीं सदी है, अब पुलिस को भी बदलना चाहिए।
पत्रकार श्याम मीरा सिंह देश के कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। पिछले कुछ सालों से वह बहुत कामयाबी के साथ अपना यूट्यूब चैनल चला रहे हैं, जिसके दर्शक-श्रोता करोड़ों में हैं। संभव है किसी पुलिसकर्मी और उनके बीच बहसा-बहसी हुई हो पर पुलिस प्रशासन को इसे “तिल का ताड़” नहीं बनाना चाहिए था कि वह नेशनल अखबारों की खबर बन जाय! पत्रकार वहां लोगों की जिंदगी से जुड़े एक महत्वपूर्ण पक्ष की जानकारी ले रहे थे, कोई आपराधिक कृत्य में नहीं लिप्त थे। मजे की बात है कि टीवी वाले जब अपने किसी कार्यक्रम के लिए आम लोगों की बाइट के लिए सड़क या किसी सार्वजनिक स्थल पर आते हैं तो पुलिस वाले उनकी सहूलियत और सुरक्षा के लिए बाकायदा स्थल पर तैनात दिखते हैं।
निस्संदेह, पत्रकार श्याम मीरा सिंह और उनकी टीम के खिलाफ यह अनुचित, अन्यायपूर्ण और निंदनीय कारवाई है। प्रदेश के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लेना चाहिए।
(उर्मिलेश की फेसबुक वॉल से साभार)