मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की कोशिश की घटना पर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और आरएसएस ने नफरत का ऐसा माहौल बनाया है जिसमें एक वकील मुख्य न्यायाधीश पर हमले की कोशिश कर पाता है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह संघ परिवार की फैलाई नफ़रत का अक्स है। उन्होंने घटना को खतरनाक करार देते हुए कहा कि इसे एक व्यक्ति का कृत्य मानना बढ़ती असहिष्णुता की अनदेखी करना होगा।
उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “मुख्य न्यायाधीश पर हमले के प्रयास की कड़ी निंदा करता हूं। यह घटना आरएसएस की फैलाई नफ़रत का अक्स है।”
कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य सुप्रिया श्रीनेत ने हमले को सामाजिक, राजनीतिक हास का अंग बताते हुए कहा, “यह स्वयंभू धर्म के ठेकेदार नहीं, ज़ोंबी हैं। केवल एक ही व्यक्ति देश को इन हालात तक ले आया है और वह नरेंद्र मोदी हैं। देश की सर्वोच्च अदालत में वरिष्ठतम न्यायाधीश के साथ ऐसा होना धार्मिक कट्टरता नहीं, पागलपन है।
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा में उपनेता सागरिका घोष ने ऑनलाइन दुष्प्रचार और ऑफलाइन हिंसा को जोड़ते हुए कहा कि भाजपा और उसकी आईटी सेना लोगों को बांटने, हिंसक भाषा और हैशटैग से ऑनलाइन नफरत फैलाने, व्यक्तियों को निशाना बनाने की संस्कृति विकसित की है, जिससे ऑफलाइन हिंसा पनपती है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आज के दिन को “काला दिन” करार देते हुए कहा, “वह एक दलित को मुख्य न्यायाधीश के रूप में नहीं देख पा रहे। यह बाबासाहेब का सपना था। हम बार बार कह रहे हैं कि देश में जाति और धर्म के नाम पर नफरत फैलाई गई है। यह उसका नतीजा है। वह दलितों और मुस्लिमों को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। दुनिया में हमारा देश अलग थलग पड़ चुका है। आप विश्वगुरु बनना चाहते थे, लेकिन भारत ने सब दोस्त खो दिए हैं।