Saturday, May 28, 2022

अमिताभ शुक्ल

महात्मा गांधी के विचारों की प्रासंगिकता एवं उनसे असहमति: कारण और परिणाम

विचार कभी समाप्त नहीं होते हैं। विशेषकर जन नायकों द्वारा समाज को प्रभावित और उद्ववेलित कर परिवर्तन वादी विचार सदैव प्रासंगिक होते हैं, समाज में विचार, मंथन एवं व्यवस्था में सुधार का मार्ग प्रशस्त करते रहते हैं । यही...

गिरते लोकतंत्र के बैरोमीटर पर ऊंचा होता भ्रष्टाचार का पैमाना

भारतीय अर्थव्यवस्था से संबंधित तीन  महत्वपूर्ण  आकलन इस वर्ष जारी हुए हैं: प्रथम, वर्तमान में  भारत में भ्रष्टाचार में अत्यधिक वृद्धि हुई है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर  भारत के भ्रष्टाचार इंडेक्स में पिछले वर्षों में वृद्धि, लोकतंत्र में गिरावट आना...

कोरोना के बाद वैश्विक स्तर पर कृत्रिम अर्थव्यवस्था की पैदाइश

कोरोना-त्रासदी से उत्पन्न नई वैश्विक अर्थव्यवस्था द्वारा एक नई कृत्रिम वैश्विक अर्थव्यवस्था का जन्म हुआ है, जिसमें आवश्यकता, निवेश,  उत्पादन और उपभोग के  स्वरूप को बदल दिया गया है। इसके पूर्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में परिवर्तन के द्वारा विकासशील देशों...

आर्थिक बदहाली ने तोड़ दी है जनता की कमर

विश्व और देश की भीषण त्रासदी के दौर से गुजरता हुआ देश का आम नागरिक त्रस्त एवं  प्रताड़ित है। संक्रमण के कारण स्वास्थ्य और जीवन पर संकट की जो स्थिति मार्च 2020 में प्रारंभ हुई थी, वह निरंतर जारी रही और मार्च 2021 में भीषणतम हो...

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साम्प्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

जब सुप्रीम कोर्ट ने असाधारण तत्परता से अनवरत सुनवाई कर राम मंदिर विवाद में बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं के...