मोहन मुक्त

रोजी-रोटी और पलायन के जटिल परतदार प्रश्न को मधुर समानुभूति के साथ दो मुल्कों की ज़मीन पर उकेरता एक अद्भुत गीत

रोजी-रोटी और पलायन के जटिल परतदार प्रश्न को मधुर समानुभूति के साथ दो मुल्कों की ज़मीन पर… Read More

नरेश सक्सेना की कविता ‘चंबल एक नदी का नाम’ ब्राह्मण मिथकों को दिलाती है प्रमाणिकता

“प्रगतिशील कविता मिथक के साथ न तो बह सकती है ना ही उसमें डूब सकती है, उसे… Read More

फैज़ अहमद फैज़ की कविता और प्रेम, देह, प्रतिरोध पर एक नज़रिया

‘मुझसे पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न मांग’  फैज़ अहमद फैज़ की बेहद मशहूर नज़्म, इतनी मशहूर… Read More

दलित स्त्री-3: स्त्रीवाद और दलित स्त्री/भ्रामक अवधारणा बनाम वास्तविक संघर्ष

1841 में भारत के वर्तमान महाराष्ट्र प्रांत में एक महार दलित परिवार में पैदा हुई मुक्ता साल्वे,… Read More

बाबा साहेब के गहरे वैचारिक पक्षों को सामने लाती है ‘….आंबेडकर एक जीवनी’

डॉ. भीम राव आंबेडकर के व्यक्तित्व और उनके अवदान को लेकर भारत के बौद्धिक वर्ग में आम… Read More