Sunday, October 17, 2021

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नलिनी तनेजा

दो सावरकर नहीं हैं ‘1857’ और ‘हिन्दुत्व’ के लेखक

(सावरकर को लेकर यह भ्रम प्रगतिशील समझे जाने वाले बुद्धिजीवियों में भी आम रहा है कि `हिन्दुत्व का सिद्धांतकार` अपने शुरुआती दौर में धर्मनिरपेक्ष था। यह भ्रम 1909 में आई सावरकर की पुस्तक ‘वार ऑफ इंडिपेंडेंस, 1857’  की बुनियाद...

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