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प्रमोद रंजन

द्विज बौद्धिकों के मुकाबले हैनी बाबू और साई बाबा ने चुकाई है कुछ ज्यादा कीमत

दिल्ली यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के अध्यापक हैनी बाबू मुसलीयारवेटिल थारायिल (हैनी बाबू, 54 वर्ष) को नेशनल इन्विस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने…

2 months ago

राम मंदिर निर्माण से पहले उत्तर भारत पहुंची ‘सच्ची रामायण’, पेरियार और पोंगापंथ का होगा आमना-सामना

(भारतीय विधायिका और न्यायपालिका ने मिलकर पिछले दिनों ऐसा परिदृश्य बनाने की कोशिश की मानो राम भारत के संपूर्ण बहुसंख्यक…

2 months ago

विशेष लेख: विज्ञान और विशेषज्ञता के आतंक के दौर में बुद्धिजीवियों की ज़िम्मेदारी

इस लेख के अंत में हम न्यूर्याक टाइम्स के संवाददाता रहे एलेक्स बेरेनसन की किताब“कोविड- 19 और लॉकडाउनों से संबंधित…

3 months ago

लॉकडाउन की भेड़चाल और शातिर-अदृश्य गड़ेरिया

महामारी से बचने के लिए लॉक डाउन का आधार क्या है? अगर चीन ने वुहान में लॉकडाउन नहीं किया होता…

3 months ago

कोविड के भ्रामक आंकड़े, भारतीय मध्य-वर्ग और पत्रकारिता

दुनिया में जब लॉकडाउन की शुरुआत हुई तो नागरिकों के दमन की ख़बरें सबसे ज्यादा केन्या व अन्य अफ्रीकी देशों…

3 months ago

कोविड 19 : हिंदी पट्टी में कोई सवाल क्याें नहीं है?

फरवरी, 2020 में जब अखबारों में दुनिया में एक नए वायरस के फैलने की सूचना आने लगी और मेरे सहकर्मियों…

3 months ago

अदृश्य महामारी और राजनीतिक संस्कृतियों का अंतर

अप्रैल के पहले सप्ताह में अपनी फेसबुक वॉल पर स्वीडन के बारे में लिखते हुए मैंने कोविड -19 से निपटने…

4 months ago

कोरोना के संक्रामक आतंक को जरा ‘जूम’ करके देखें

आज ऐसे तथ्यों की कमी नहीं है, जो बताते हैं कि कोविड 19 से कई गुणा विनाशकारी इससे उपजे आतंक…

5 months ago

आंकड़ों की राजनीति और लॉकडाउन से होने वाली मौतें

यूरोमोमो (EuroMOMO) नामक संस्था ने 24 यूरोपीय देशों में 16 मार्च, 2020 से 19 अप्रैल , 2020 के बीच हुई…

5 months ago

संक्रामक बीमारियों के भारतीय महासागर में कोरोना कितनी जगह घेरता है?

क्या सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर समूहों को भी कोरोना वायरस से उतना ही खतरा है, जितना कि अन्य…

5 months ago