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बीच बहस

हर कोई बीबा जाणदै: जहाज़ में पानी भर गया है और कप्तान झूठ बोल रहा है

हर कोई बीबा जाणदैकित्थों कहर घटावाँ आइयाँहर कोई बीबा जाणदैपई अग्गां कीन्हाँ लाइयाँहर कोई बीबा जाणदैमुहब्बतां कीवें टुट्टियाँहर कोई बीबा जाणदैपई इज्जतां कीन्हें लुट्टियाँहर कोई [more…]

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राजनीति

खड़ी रहूंगी सच के साथ

मुसीबतों में अग्रसर हैं लड़कियां ढूंढती सावन ढूंढती हैं सावन के गीत अग्रसर हैं लड़कियां… आंखों में अनोखी मुराद हक-सच दिल में धड़कता दिल में [more…]

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बीच बहस

ये सूरत बदलनी चाहिए

“नित्य-परिवर्तनशील अनंत/अदृश्य जगत में जनसमूह ऐसी अवस्था में पहुंच गए थे जहां वे एक ही समय में हरेक बात पर विश्वास कर रहे थे और [more…]

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बीच बहस

शिलांग बनाम लतीफ़पुरा: जिनके पास काग़ज़ात नहीं होते

सवाल यह है कि जिनके पास काग़ज़ात नहीं होते, क्या वे इंसान नहीं होते? क्या केवल नक्शों, काग़ज़ों, अभिलेखों के आधार पर ही ज़मीन का [more…]

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बीच बहस

एक चुनौती है गरीब किसान-मजदूर की आत्महत्या

देश के दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्याओं के आंकड़े, उनकी दर्दनाक हालात बयान करते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के हाल ही में 2021 के जारी [more…]

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बीच बहस

रश्दी पर हमला: धार्मिक आस्था ही नहीं, इतर राय वाली भावनाओं की भी अहमियत

सलमान रश्दी का उपन्यास ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ (आधी रात दी संतान) के मुख्य पात्र सलीम सिनाई का जन्म 14-15 अगस्त 1947 ठीक मध्यरात्रि में 14 अगस्त [more…]

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संस्कृति-समाज

डर, ऐ मेरे देश, तू डर…

डर, डर मेरे दिल, डर, डर, इतना डर, कि डर  बन जाये तेरा घर  डर में ही तेरा बचाव, छुपाओ, अपने आप को छुपाओ छुपाओ [more…]

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बीच बहस

जज साहब! यह हमारी फ़ितरत नहीं

कौन बसाये गाँव रे भैयाकौन बसाये शहर?कौन गढ़े समय का घड़ाबाँधे कौन ये पहर?कौन घोलता अमृत प्यालाकौन पिये ये ज़हर?कौन तैरे नद सु़ख़न काबाँधे कौन [more…]

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संस्कृति-समाज

बेघर हो रहे कलाकार

शहरी आवास और विकास मंत्रालय/विभाग ने देश के जाने-माने कलाकारों, जो पिछले कई सालों से दिल्ली के सरकारी फ्लैटों में रह रहे हैं, को 31 [more…]

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बीच बहस

बोलिविया में समाजवादियों की बड़ी वापसी

सारी दुनिया में यह बहस खड़ी करने के लिए बड़े यत्न किए जाते हैं कि समाजवादी /साम्यवादी और वामपंथी मोर्चे पर पार्टियां बनाने और उनके [more…]