उपेंद्र चौधरी

श्री रामकृष्ण परमहंस: “जतो मत, ततो पथ”, यानी धार्मिक विविधता की स्वीकृति का दर्शन

श्री रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) उन्नीसवीं सदी के भारतीय संत और आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने सभी धर्मों की… Read More

धार्मिक आयोजन और भगदड़: कमजोर भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की कमी का खामियाजा

दुनिया भर के होने वाले धार्मिक आयोजन हर साल अनगिनत श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। लेकिन, बड़े… Read More

मूल्यों और प्रगति को बदरंग करता अंधविश्वास,धर्म और आध्यात्मिकता का घालमेल

जितना पुराना धर्म है, उससे कहीं ज़्यादा पुराना शायद अंधविश्वास है। शुरुआत में हर धर्म सही मायने… Read More

देशद्रोह के रूप में विरोध और असहमति का दमन शासकों की एक ऐतिहासिक प्रवृत्ति

इतिहास में अक्सर शासकों ने विरोध और असहमति को देशद्रोह के रूप में देखा है ताकि वे… Read More