Monday, December 5, 2022

तीन जजों के तबादले के कॉलेजियम की सिफारिशों पर गुजरात, तेलंगाना और मद्रास हाईकोर्ट के वकील आंदोलित

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सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों के कॉलेजियम ने बुधवार को नए मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में अपनी पहली बैठक की, और प्रशासनिक कारणों और न्याय प्रशासन की अनिवार्यताओं का हवाला देते हुए उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों के तबादलों की सिफारिश की गई, जिनमें मद्रास हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी राजा को राजस्थान हाईकोर्ट गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस निखिल एस. करियल और तेलंगाना हाईकोर्ट के जस्टिस ए. अभिषेक रेड्डी को पटना हाईकोर्ट भेजने का निर्णय लिया गया था।इससे क्षुब्ध होकर गुजरात हाईकोर्ट के वकील हड़ताल पर चले गये तथा तेलंगाना और मद्रास हाईकोर्ट के वकील आंदोलित हैं।  

चीफ जस्टिस धनंजय चंद्रचूड़ गुजरात उच्च न्यायालय के हड़ताली वकीलों से मिलने के लिए सहमत हो गए हैं, जो न्यायमूर्ति निखिल एस करियल के पटना उच्च न्यायालय में प्रस्तावित स्थानांतरण का विरोध कर रहे हैं। सीजेआई शनिवार सुबह वकीलों के एक प्रतिनिधिमंडल से मिलेंगे।

इस बीच, गुजरात उच्च न्यायालय के सभी अदालत कक्षों में आज सन्नाटा पसरा रहा क्योंकि प्रस्तावित तबादले के विरोध में वकीलों की हड़ताल के कारण न्यायाधीशों का स्वागत खाली कोर्ट हॉल से किया गया। जस्टिस करियल के पटना उच्च न्यायालय में तबादले की खबर मीडिया में आने के बाद से जीएचसीएए गुरुवार से विरोध प्रदर्शन कर रहा है। गुजरात हाईकोर्ट के सुबह के सत्र के दौरान, 300 से अधिक अधिवक्ता गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार के कोर्ट हॉल में शोक मनाने के लिए एकत्र हुए थे, जिसे उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता की मृत्यु के रूप में संज्ञा दी।वकीलों ने जस्टिस करियल को स्थानांतरित करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने तक अनिश्चित काल तक काम से दूर रहने का संकल्प लिया था।

26 सितंबर के बाद से पांच-न्यायाधीशों के कॉलेजियम की यह पहली बैठक थी, जब उसने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता के नाम की सिफारिश केंद्र से की थी। कॉलेजियम, जिसमें जस्टिस संजय के कौल, एस अब्दुल नज़ीर, केएम जोसेफ और एमआर शाह भी शामिल हैं, ने जस्टिस राजा को राजस्थान एचसी में स्थानांतरित करने पर सहमति व्यक्त की।

हैदराबाद में वकीलों ने एक प्रदर्शन किया और न्यायमूर्ति ए अभिषेक रेड्डी को बिहार की राजधानी में स्थानांतरित करने के विरोध में सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला किया।तेलंगाना हाईकोर्ट के विरोध करने वाले वकीलों ने कहा कि उन्हें कोई कारण नहीं दिखता कि एक ईमानदार न्यायाधीश को बाहर क्यों निकाला गया, अगर यह एक निंदनीय “डिजाइन” का हिस्सा नहीं है। उन्होंने यह नहीं बताया कि “डिज़ाइन” क्या हो सकता है।

इससे पहले, नवंबर 2018 में, गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसियेशन के सदस्यों ने जस्टिस अकील कुरैशी को बॉम्बे हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की सुप्रीमकोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश का विरोध किया था। और एक साल पहले, जब न्यायमूर्ति जयंत पटेल को कर्नाटक हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया था, तब उन्होंने स्थानांतरण और पदोन्नति नीति का विरोध किया था।

गुजरात और तेलंगाना के बाद मद्रास हाईकोर्ट बार ने भी कॉलेजियम के फैसले का विरोध करते हुए कार्यवाहक सीजेटी राजा के तबादले पर आपत्ति जतायी ने है।मद्रास उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी राजा के राजस्थान उच्च न्यायालय में प्रस्तावित स्थानांतरण का विरोध किया है ।

शुक्रवार को लिखे एक पत्र में, मद्रास उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ ने अपने अध्यक्ष जी मोहना कृष्णन के माध्यम से कहा है  कि “आसन्न” स्थानांतरण सिफारिश न्यायपालिका के लिए अच्छा नहीं है और इसे “दक्षता और न्यायिक शालीनता के लिए निरुत्साहित” माना जाएगा।एसोसिएशन ने पत्र में कहा है कि जब से जस्टिस राजा ने इस साल 22 सितंबर को मद्रास उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला है, तब से उन्होंने उच्चतम मर्यादा बनाए रखी है।जस्टिस राजा जनता के न्यायाधीश हैं, जो इस बात की परवाह किए बिना न्याय करते हैं कि मामले में बहस कौन कर रहा है।

मद्रास उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ ने यह भी कहा कि न्यायमूर्ति राजा की सेवा से सेवानिवृत्ति से लगभग छह महीने पहले स्थानांतरण आदेश न्यायपालिका के लिए बुरी खबर है ।

मद्रास हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (एमएचएए) ने प्रस्तावित स्थानांतरण के लिए अपना सबसे मजबूत विरोध दर्ज कराया है, और उच्चतम न्यायालय, कॉलेजियम और भारत सरकार से प्रस्ताव को रद्द करने और जस्टिस राजा को  कार्य करने की अनुमति देने का आह्वान किया है। पत्र में कहा गया है कि मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अपनी वर्तमान क्षमता में तब तक बने रहेंगे जब तक कि वह सेवानिवृत्त नहीं हो जाते।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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