Monday, January 24, 2022

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लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करने के प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

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बेटियों की शादी की उम्र अब 18 से बढ़ाकर 21 साल करने संबधी प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति मिल गयी है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को सर्व सम्मति से पारित कर दिया गया। केंद्र सरकार मौजूदा कानूनों में संशोधन के लिए अब संसद में प्रस्ताव प्रस्तुत करेगी। इसके लिए सरकार बाल विवाह निषेध कानून, स्पेशल मैरिज एक्ट और हिंदू मैरिज एक्ट में संशोधन करेगी। 

बता दें कि केंद्र सरकार ने साल 2020 के जून महीने में इसे लेकर नीति आयोग में जया जेटली की अध्यक्षता में टास्क फोर्स गठित की थी। दिसंबर, 2020 में टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में लड़कियों की विवाह की आयु बढ़ाने की सिफारिश करते हुए वो रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। समता पार्टी की पूर्व सदस्य और टास्क फोर्स की प्रमुख जया जेटली ने इसकी सिफारिश की थी। उन्होंने कहा था कि यह क़दम महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए था न कि जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिये। नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल भी इस टास्क फोर्स के सदस्य थे। इनके अलावा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, महिला तथा बाल विकास, उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा तथा साक्षरता मिशन और न्याय तथा कानून मंत्रालय के विधेयक विभाग के सचिव टास्क फोर्स के सदस्य थे। 

टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पहले बच्चे को जन्म देते समय बेटियों की उम्र 21 साल होनी चाहिए। विवाह में देरी का परिवारों, महिलाओं, बच्चों और समाज के आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गौरतलब है कि मौजूदा क़ानून के मुताबिक, देश में पुरुषों की विवाह की न्यूनतम उम्र 21 और महिलाओं की 18 साल है। 

इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872, पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट 1936, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954, और हिन्दू मैरिज एक्ट 1955, सभी के अनुसार शादी करने के लिए लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष होनी चाहिए। इसमें धर्म के हिसाब से कोई बदलाव या छूट नहीं दी गई है। फिलहाल बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू है। जिसके मुताबिक़ 21 और 18 से पहले की शादी को बाल विवाह माना जाएगा। ऐसा करने और करवाने पर 2 साल की जेल और एक लाख तक का जु़र्माना हो सकता है। 

इससे पहले पिछले साल 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि लड़कियों की शादी की उम्र को लेकर सरकार समीक्षा कर रही है कि लड़कियों की शादी की सही उम्र क्या हो, इसके लिए कमेटी बनाई गई है, उसकी रिपोर्ट आते ही बेटियों की शादी की उम्र को लेकर उचित फैसला लिया जाएगा।  अब सरकार लड़कियों के लिए इस सीमा को बढ़ाकर 21 साल करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सांसद जया जेटली की अध्यक्षता में 10 सदस्यों की टास्क फ़ोर्स का गठन किया गया है, जो इस पर अपने सुझाव जल्द ही देगी। 

दरअसल, बेटियों की शादी की उम्र को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में वकील और दिल्ली भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने एक याचिका दायर की थी। अपनी याचिका में उन्होंने कहा था कि लड़कियों और लड़कों की शादी की उम्र का कानूनी अंतर खत्म किया जाए। इस याचिका पर जब केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया तो केंद्र ने बताया था कि इस मामले पर एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है।

भारत में लड़कियों की शादी की उम्र को लेकर हमेशा से ही  बहस होती आ रही है। बाल विवाह जैसी प्रथा पर रोक के लिए आजादी के पहले भी कई बार लड़कियों की शादी की उम्र को लेकर बदलाव किया गया।  साल 1927 में शिक्षाविद्, न्यायाधीश, राजनेता और समाज सुधारक राय साहेब हरबिलास सारदा ने बाल विवाह रोकथाम के लिए एक विधेयक पेश किया। विधेयक में शादी के लिए लड़कों की उम्र 18 और लड़कियों के लिए 14 साल करने का प्रस्ताव था। 1929 में यह कानून बना जिसे सारदा एक्ट के नाम से जाना जाता है। 1978 में इस क़ानून में संसोधन हुआ और लड़कों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 और लड़कियों के लिए 18 साल कर दी गई। फिर साल 2006 में बाल विवाह रोकथाम कानून लाया गया।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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