Sunday, October 17, 2021

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सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना, पूर्व डीजीपी लूथरा समेत चार के खिलाफ जांच के आदेश

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विवादों में घिरे रहे सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना पर आरोप है कि उनके  इशारे पर चंडीगढ़ के एक दांतों के डॉक्टर से 50 लाख रुपए ऐंठने का प्रयास किया गया। डॉक्टर की शिकायत पर अस्थाना, चंडीगढ़ के पूर्व डीजीपी तेजिंदर सिंह लूथरा, दिल्ली वापस जा चुके डीएसपी सतीश कुमार और इंस्पेक्टर अश्वनी कुमार के खिलाफ सतर्कता जांच के आदेश दिए गए हैं। इस मामले में सीबीआई ने खुद केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के मुख्य सतर्कता अधिकारी यानी सलाहकार मनोज परिदा को लिखा है कि सारा मामला चंडीगढ़ का है। वहीं अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। इसी कारण केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) के सतर्कता अधिकारी ही इस मामले की जांच करें।

यूटी विजिलेंस ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कर शिकायतकर्ता डॉक्टर मोहित से पूछा था कि अगर वे शिकायत पर कायम हैं, तो ही आगे जांच होगी। डॉक्टर की हामी के बाद ही आगामी कार्रवाई की गई है। राकेश अस्थाना इन दिनों नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में तैनात हैं,जबकि तेजिंदर लूथरा दिल्ली पुलिस में।

मामला सेक्टर-21 चंडीगढ़ निवासी डॉ. मोहित का है। उनका आरोप है कि आईपीएस राकेश अस्थाना के इशारे पर तत्कालीन डीजीपी लूथरा ने उनसे 50 लाख रुपए उनकी विदेशी पेशेंट को दिलवाने चाहे। इसके लिए डीएसपी सतीश कुमार औरर तत्कालीन एसएचओ अश्वनी कुमार ने हर संभव प्रयास किया। उन्हें परेशान किया। कभी घर पर पुलिस भेजी गई, तो कभी उन्हें पुलिस हेडक्वार्टर ले जाकर डीजीपी के कमरे में धमकाया गया। डॉ. मोहित का कहना है कि उनके खिलाफ कथित शिकायत जनवरी 18 में दर्ज की गयी जबकि उन्हें पूछताछ के लिए 8 नवम्बर, 17 को ही समन भेजकर सेक्टर 19 के थाने में बुलाया गया। इसी तरह शिकायत दर्ज़ होने के पहले डीएसपी सतीश ने भी समन भजकर उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया। डॉ. मोहित ने अपनी शिकायत के साथ दोनों समन भी संलग्न किये हैं।

दरअसल अमेरिका से डिसूजा नामक एक महिला अपने दांतों का इम्प्लान्टेशन कराने आई थी। जांच और उपचार कराने के बाद उस महिला ने डॉ. मोहित को 12 हजार डालर के स्थान पर सात लाख का चेक दिया जो बाउंस हो गया। डॉ. मोहित ने चेक बाउंस का केस स्थानीय अदालत में दाखिल किया तो महिला ने पहले सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के नाम पर धमकी दी कि वह उन्हें फंसा देगी। इसके बाद डॉ. मोहित को पुलिस द्वारा तरह-तरह से परेशान किया जाने लगा।    

डॉक्टर मोहित ने सितंबर 2019 में सीबीआई डायरेक्टर को शिकायत दी थी। सीबीआई ने जांच की तो सामने आया कि डॉक्टर ने कोई पैसा नहीं दिया, सीधा पुलिस के खिलाफ कोर्ट चले गए। इसलिए शिकायत से लग रहा है कि इसमें पावर का मिसयूज कर डॉक्टर को परेशान किया गया। इसलिए इस शिकायत को चंडीगढ़ विजिलेंस देखे। मामले में बड़े अफसर शामिल हैं। इसलिए सीबीआई ने सीधा एडवाइजर मनोज परिदा को जांच के लिए कहा है। आदेश के बाद विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। पहले शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद जिन अफसरों पर आरोप लगे हैं। उन्हें जांच में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा।

सीबीआई में दूसरे नंबर पर तैनात रह चुके पूर्व स्पेशल डॉयरेक्टर राकेश अस्थाना पहले भी विवादों में रहे हैं। पहले वह सीबीआई के डॉयरेक्टर आलोक कुमार से चले तनाव को लेकर विवादों में रहे। राकेश अस्थाना पर 4,000 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिग मामले में शामिल होने का आरोप है, जिसकी जांच ख़ुद सीबीआई कर रही है। सीबीआई ने उनके खिलाफ ही करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया था,जिसकी जाँच अभी भी चल रही है।

गौरतलब है कि मोईन क़ुरैशी भ्रष्टाचार मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रही थी। अस्थाना इस टीम के अध्यक्ष थे। इसी मामले की जांच करते हुए एक बिज़नेसमैन से रिश्वत लेने के आरोप में राकेश अस्थाना का नाम आरोपी नंबर एक के रूप में शामिल किया गया था । बीते 21 सितंबर को सीबीआई ने कहा था कि उसने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को इस बात की जानकारी दी थी कि वे राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के छह मामलों की जांच कर रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अब सीबीआई ने टेलीफ़ोन इंटरसेप्ट्स, व्हाट्सएप मैसेज़, पैसे की हेरा-फेरी (मनी ट्रेल) के सबूत मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत दर्ज कराया था।इसके अलावा एफ़आईआर में ख़ुफ़िया संगठन रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) के विशेष निदेशक सामंत कुमार गोयल के नाम को भी शामिल किया गया है। हालांकि, इनका नाम आरोपी के रूप में नहीं है।

हैदराबाद के कारोबारी साना सतीश की शिकायत पर दुबई स्थित बिचौलिया मनोज प्रसाद की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ कदम उठाया था। कुरैशी भ्रष्टाचार के मामले में प्रसाद की भूमिका को लेकर अस्थाना की निगरानी में सीबीआई तथा एसआईटी द्वारा जांच की जा रही थी। कुरैशी पर फरवरी 2014 में आयकर विभाग द्वारा छापा मारा गया था। उस समय तत्कालीन सीबीआई निदेशक एपी सिंह के साथ उसके ब्लैकबेरी मैसेंजर (बीबीएम) संदेशों को बरामद किया गया था ।

इसके बाद सिंह को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के सदस्य के पद से इस्तीफा देना पड़ा था । इसके तीन साल बाद फरवरी 2017 में सीबीआई द्वारा केस दर्ज किया गया।सतीश ने 4 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट के समक्ष एक बयान दिया था, जिसमें अस्थाना, बिचौलिया प्रसाद और प्रसाद के रिश्तेदार सोमेश श्रीवास्तव का नाम था । उसने बताया कि किस तरह सीबीआई मामले से दूर रहने के लिए उसने दिसंबर 2017 से लेकर 10 महीने तक में तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया था ।सतीश ने कहा कि ज्यादा पैसे देने के लिए उसे सीबीआई अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित भी किया गया था।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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