संस्कृति-समाज

किताब पर चर्चा: आज के समय में गंभीर हस्तक्षेप हैं मुकुल सरल की ग़ज़लें और नज़्में

नई दिल्ली। “इस किताब में बहुतों की आवाज़ शामिल है। इसमें मुल्क के आज के हालात को… Read More

भक्ति कविता कौशल से नहीं बल्कि आचरण से पैदा हुई कविता है: सदानंद शाही

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित में ‘भक्तिकाल और भारत का स्वप्न’विषयक एकल व्याख्यान… Read More

पुस्तक समीक्षा: अपने समय के सच को उजागर करती मारक विमर्श की कविताएं

पुस्तक समीक्षा:  कवि पंकज चौधरी समाज की वर्तमान अवस्था पर पैनी नज़र रखने वाले विलक्षण कवि हैं।… Read More

‘मेरी आवाज़ में है तू शामिल’: बेबाक ग़ज़ल, सच्ची नज़्में

मेरे हाथ में जब ‘गुलमोहर किताब’ प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित कवि/शाइर/पत्रकार और जनवादी लेखक मुकुल सरल की… Read More

लोकरंग महोत्सव: लोक संस्कृति को बचाने के लिए साझा आंदोलन समय की मांग

कुशीनगर। लोक संस्कृति पर हो रहे सांस्कृतिक हमले के खिलाफ साझा आंदोलन की जरूरत महसूस की जा… Read More

लोकरंग महोत्सव की पहली शाम: गीत व नृत्य में दिखी विलुप्त हो रही भारतीय साझा संस्कृति 

कुशीनगर। सांस्कृतिक भड़ैती व फूहड़फन के खिलाफ जनसंस्कृति को स्थापति करने के संकल्प के साथ 15 अप्रैल… Read More