संस्कृति-समाज

भक्ति कविता कौशल से नहीं बल्कि आचरण से पैदा हुई कविता है: सदानंद शाही

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित में ‘भक्तिकाल और भारत का स्वप्न’विषयक एकल व्याख्यान… Read More

पुस्तक समीक्षा: अपने समय के सच को उजागर करती मारक विमर्श की कविताएं

पुस्तक समीक्षा:  कवि पंकज चौधरी समाज की वर्तमान अवस्था पर पैनी नज़र रखने वाले विलक्षण कवि हैं।… Read More

‘मेरी आवाज़ में है तू शामिल’: बेबाक ग़ज़ल, सच्ची नज़्में

मेरे हाथ में जब ‘गुलमोहर किताब’ प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित कवि/शाइर/पत्रकार और जनवादी लेखक मुकुल सरल की… Read More

लोकरंग महोत्सव: लोक संस्कृति को बचाने के लिए साझा आंदोलन समय की मांग

कुशीनगर। लोक संस्कृति पर हो रहे सांस्कृतिक हमले के खिलाफ साझा आंदोलन की जरूरत महसूस की जा… Read More

लोकरंग महोत्सव की पहली शाम: गीत व नृत्य में दिखी विलुप्त हो रही भारतीय साझा संस्कृति 

कुशीनगर। सांस्कृतिक भड़ैती व फूहड़फन के खिलाफ जनसंस्कृति को स्थापति करने के संकल्प के साथ 15 अप्रैल… Read More

जयंती पर विशेष: ‘हरिऔध’, जिन्होंने रचा खड़ी बोली का पहला महाकाव्य

कोई पूछे कि खड़ी बोली में रचा गया हिन्दी का पहला महाकाव्य कौन-सा है, तो हिंदी साहित्य… Read More