इन दिनों जेन-जी जब देश भर के युवाओं और विपक्ष के तमाम नेताओं के मन भाया हुआ है जिन्होंने सामाजिक व्यवस्था को बदलने और उसे सुधारने का बीड़ा उठाया है। जिससे भारत सरकार विचलित है।जिसे पाकिस्तान से फंडिंग की बात कह रही है, उन्हें देशद्रोही बता रही थी। उसके प्रधानमंत्री ने इसी तरह मीठे बोल बोलकर काकरोच के आंदोलन कारियों के साथ हुए व्यवहार पर असंतोष नहीं जताया है बल्कि गाली देने वालों माफ़ करने की बात की है।
जिससे जेन जी के नेता नाखुश हैं क्योंकि उन्होंने कहा कि इन युवक युवतियों के साथ जिस तरह का दुर्व्यवहार करवाया गया है और फिर माफी की बात आई।इससे सरकार की मानसिकता उजागर होती है।जिसे जेन जी ने बखूबी पहचान लिया है। दूसरे माई फ्रेंड कहकर और बच्चों की गलतियां माफ़ करने की बात आई। लेकिन इससे ना तो युवाओं को राहत मिली और ना ही मामलों में कोई राहत मिली है।उल्टे दमन चक्र बराबर जारी है।
अब इसके बाद अब भारत सरकार को अपने रिमोट से चलाने वाले संघ प्रमुख मोहन भागवत जी ने भी पलटी मारी है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक युवा संवाद कार्यक्रम में जेन-जी (Gen-Z) और जेन-अल्फा पीढ़ी को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार और देशभक्त है ।
मोहन भागवत ने कहा कि जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों को गलत नहीं माना जाना चाहिए। यदि युवा आंदोलन कर रहे हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वे देश विरोधी हैं। उनका मानना था कि यदि समय रहते युवाओं से बातचीत कर ली जाती, तो आंदोलनों की स्थिति ही पैदा नहीं होती। संवाद स्थापित करना लोकतंत्र का एक अहम हिस्सा है। संघ प्रमुख ने जोर दिया कि युवाओं पर अपनी बात थोपने के बजाय उनकी शिकायतों को प्रेम और सहानुभूति के साथ सुनना और समझना चाहिए।
यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि अभिजीत उस नगर पुणे से आता है जो संघ का गढ़ माना जाता है। अभिजीत दीपके की दूसरी बात यह है कि वह दलित समाज से आता है भारत में हो रही सभी घटनाओं और स्थितियों से वह पूरी तरह परिचित है।वह बहुत अधिक समझदार है और लगता है उसे जनता में जो स्नेह और प्यार मिला है। उससे वह कतई विचलित होने वाला नहीं है।
इसलिए उसने एक सितम्बर से जो मास्टर प्लान बनाया है वह बहुमूल्य है।
इससे देश भर की शैक्षणिक संस्थाओं में संघ की भूमिका ही कटघरे में खड़ी दिखती है। इसलिए इस जेन-जी और जेन अल्फा को फुसलाने का दौर भागवत शुरू करना चाहते हैं।
यह सच है कि इस आंदोलन से सरकार और संघ कितना विचलित है-यह स्पष्ट नज़र आ रहा है। इसलिए आइसा नेत्री जन-जन में लोकप्रिय युवा आंदोलन की सर्वाधिक ऊर्जावान नेहा बोरा पर झारखंड में प्रायोजित तरीके से संघ के अनुषंगी संगठन हमलावर हो चुके हैं। यही हाल सरकार विरोधी विपक्ष का हो रहा है संघ सरकार के लोग अब खुलकर आमने-सामने खड़े होने लगे हैं यह खिसकती सत्ता को बचाने का अंतिम अस्त्र है जो कामयाब होता नज़र नहीं आ रहा है।
इन मीठी-मीठी बातों की चाल से जेनजी और जेन अल्फा को भ्रमित नहीं होना चाहिए।
(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)